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होलाष्टक: आखिर क्यों आठ दिनों के लिए थम जाते हैं मांगलिक कार्य?

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होलाष्टक: आखिर क्यों आठ दिनों के लिए थम जाते हैं मांगलिक कार्य?

Holashtak Kya Hota Hai In Hindi: क्या आपने कभी गौर किया है कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तिथि तक हवाओं में एक अलग ही बेचैनी होती है? हिंदू धर्म में इन आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। यह वह समय होता है जब ब्रह्मांड में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है और ग्रहों की स्थिति थोड़ी उग्र हो जाती है।

इसीलिए इस दौरान शादी-ब्याह, गृह प्रवेश या नया व्यापार शुरू करने जैसे बड़े फैसलों को कुछ दिनों के लिए टाल दिया जाता है। होलाष्टक सिर्फ मनाही का नाम नहीं है। यह समय है खुद को अंदर से साफ करने का, भक्ति में डूबने का और रंगों के उत्सव के लिए मानसिक रूप से तैयार होने का।

होलाष्टक क्या होता है? (Holashtak Kya Hota Hai In Hindi)

आइए, इस ब्लॉग में जानते हैं कि Holashtak Kya Hota Hai और इसके पीछे छिपे विज्ञान और पौराणिक रहस्यों को भी करीब से समझते हैं ।

होलाष्टक क्या है और यह कब शुरू होता है?

होलाष्टक दो शब्दों होली और अष्टक से मिलकर बना है। अष्टक का अर्थ होता है आठ। यानी होली के दहन से पहले के वे आठ दिन जब हिंदू धर्म में शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है।

यह समय फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर पूर्णिमा यानी कि होलिका दहन तक चलता है। इन आठ दिनों को भक्ति, तप और संयम का समय माना गया है।

होलाष्टक की पौराणिक कथा: क्यों लगी पाबंदी?

इसके पीछे दो सबसे प्रसिद्ध कहानियाँ हैं, जो हमें सिखाती हैं कि बुराई पर अच्छाई की जीत कैसे होती है?

1. भक्त प्रह्लाद की अग्नि परीक्षा

सबसे प्रमुख कथा भक्त प्रह्लाद की है। असुर राजा हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के लिए इन आठ दिनों में उसे भयानक यातनाएं दी थीं। प्रह्लाद को ऊंचे पहाड़ों से फेंका गया, हाथियों के पैरों तले कुचलवाने की कोशिश की गई, लेकिन उसकी भक्ति कम नहीं हुई।

आठवें दिन यानी कि पूर्णिमा तिथि को होलिका उसे लेकर आग में बैठी और खुद जल गई। क्योंकि इन आठ दिनों में एक मासूम भक्त को बहुत कष्ट झेलने पड़े थे, इसलिए इन दिनों को अशुभ या शोक का प्रतीक मानकर खुशियों के काम नहीं किए जाते।

2. कामदेव का भस्म होना

एक दूसरी कथा के अनुसार, जब भगवान शिव गहरी तपस्या में लीन थे, तब कामदेव ने उनकी तपस्या भंग करने की कोशिश की थी। क्रोधित होकर महादेव ने फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन अपना तीसरा नेत्र खोला और कामदेव को भस्म कर दिया।

कामदेव की पत्नी रति ने आठ दिनों तक विलाप किया और तपस्या की, जिसके बाद शिव जी ने उन्हें पुनर्जीवित करने का आश्वासन दिया।

विज्ञान और ज्योतिष का नजरिया

होलाष्टक सिर्फ कहानियों तक सीमित नहीं है, इसके पीछे ब्रह्मांडीय ऊर्जा भी शामिल है, जैसे-

  1. ग्रहों की उग्रता: ज्योतिष शास्त्र कहता है कि इन आठ दिनों में चंद्रमा, सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु जैसे मुख्य ग्रह अपना स्वभाव उग्र कर लेते हैं। ग्रहों की यह कटुता इंसान के निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती है। गलत समय पर लिए गए बड़े फैसले भविष्य में परेशानी दे सकते हैं।
  2. मन की चंचलता: चंद्रमा मन का कारक है और इन दिनों में वह कमजोर या उग्र होता है। इससे व्यक्ति का मन भटकता है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है और एकाग्रता कम होती है। इसीलिए बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि शांति से बस प्रभु का नाम लो।
  3. ऋतु परिवर्तन: वैज्ञानिक रूप से यह ठंड और गर्मी के मिलन का समय है। इस समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कम होती है। सावधान रहने से हम बीमारियों से बच सकते हैं।

होलाष्टक में क्या न करें?

इन आठ दिनों में नीचे दिए गए कार्यों को टालना ही बेहतर माना जाता है:

  • शादी-ब्याह: विवाह या सगाई जैसे रिश्ते तय करना वर्जित है।
  • नया घर या वाहन: गृह प्रवेश, भूमि पूजन या नई गाड़ी की खरीदारी नहीं करनी चाहिए।
  • मुंडन और नामकरण: बच्चों के संस्कार इन दिनों में नहीं किए जाते।
  • नया व्यापार: कोई नया बिजनेस या दुकान खोलना शुभ नहीं माना जाता।
  • कीमती सामान: सोने-चांदी की बड़ी खरीदारी भी लोग इस समय कम ही करते हैं।

होलाष्टक में क्या करें?

भले ही शुभ काम मना हैं, लेकिन यह समय अपनी ऊर्जा बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा है। इन दिनों में आप भलाई का काम कर सकते हैं, जैसे-

  • दान करें: इस समय गरीबों को कपड़े, अनाज या गुड़ का दान करना बहुत पुण्यकारी होता है।
  • ईश्वर का ध्यान: मानसिक शांति के लिए भगवान विष्णु या शिव जी की पूजा करें।
  • सफाई: होली की तैयारी के तौर पर घर को साफ-सुथरा रखें।
  • होलिका पूजन: लकड़ियां और उपले इकट्ठे करें और होलिका की पूजा की तैयारी करें।

क्या यह समय अशुभ है?

होलाष्टक को अशुभ कहना गलत होगा, बल्कि यह सावधानी और शुद्धि का समय है। यह हमें सिखाता है कि उत्सव मनाने से पहले खुद को अंदर से साफ करना जरूरी है। जैसे हम दीपावली से पहले सफाई करते हैं, वैसे ही होलाष्टक हमारे मन की सफाई का समय है। प्रह्लाद की तरह अडिग रहें और आने वाली होली की खुशियों का स्वागत करें।

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FAQs

1. होलाष्टक कितने दिनों का होता है और यह कब शुरू होता है?

उत्तर- होलाष्टक कुल आठ दिनों का होता है। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर पूर्णिमा (होलिका दहन) तक रहता है।

2. क्या होलाष्टक के दौरान नए घर का सौदा या बयाना दिया जा सकता है?

उत्तर- शास्त्रों के अनुसार, होलाष्टक में ग्रहों की स्थिति उग्र होती है, इसलिए इस दौरान नए घर का सौदा करने या बयाना देने से बचना चाहिए। इसे टालना ही शुभ रहता है।

3. क्या होलाष्टक में पूजा-पाठ करना भी वर्जित है?

उत्तर- बिल्कुल नहीं! होलाष्टक में पूजा-पाठ, मंत्र जप और दान करना बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है।

4. होलाष्टक को अशुभ क्यों माना जाता है?

उत्तर- होलाष्टक को अशुभ इसलिए माना जाता है क्योंकि ज्योतिष के अनुसार इस दौरान सभी प्रमुख ग्रह उग्र स्वभाव के हो जाते हैं।