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200 रूपये चुकाने 34 वर्ष बाद विदेश आए इस व्यक्ति ने लौटाई इतनी बड़ी रकम

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200 रूपये चुकाने 34 वर्ष बाद विदेश आए इस व्यक्ति ने लौटाई इतनी बड़ी रकम
News : क्या आप इस बात पर यकीन करेंगे की आपने किसी व्यक्ति को 200 रूपये उधार दिए है और वह व्यक्ति को कुछ समय बाद उससे कई गुना अधिक रूपये लौटा देता है। परन्तु अब हम आपको जो बात बताने जा रहे है वह बिलकुल सही है। कुछ समय पहले केन्या से एक व्यक्ति शिक्षा के लिए भारत आया था। इस व्यक्ति के आर्थिक हालत इतने ख़राब थे की वह किसी दूकान की उधारी भी नहीं चुका पाता था।  इतना  नहीं जब इस व्यक्ति को अपने देश वापस लौटना था तो वह एक किराना की दुकान से 200 उधार लेकर गया था। अब हम आपको जो बताने वाले है आप उस बात को जानकर हैरान जाएंगे। वह व्यक्ति 34 वर्ष बाद एक बार फिर भारत आया। लेकिन इस बार वह केन्या के मंत्री के रूप में भारत आया था।  वह व्यक्ति मंत्री जरूर बन गया परन्तु वह उस दूकानदार के 200 रूपये नहीं भुला। जिससे उस व्यक्ति ने उधार के तौर पर लिए थे। दुकानदार औरंगाबाद का निवासी है। इस व्यक्ति ने उस दुकानदार को ढूँढ़कर उसे 200 के रूप में 19 हजार रूपये दिए है।

औरंगाबाद के मौलाना आजाद कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की रिचर्ड ने

केन्या के इस मंत्री ने 34 वर्ष पहले रिचर्ड टोनगी महाराष्ट्र में औरंगाबाद के मौलाना आजाद कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की थी। इस दौरान वह वर्ष 1985 से 1989 तक महाराष्ट्र के औरंगाबाद में ही रहे। लेकिन वह जिस समय शिक्षा प्राप्त  कर रहे थे उस दौरान वह रिचर्ड कॉलेज के करीब वानखेड़े नगर में रहते थे। यह काशीनाथ गवली के पड़ोस में रहते थे। जहाँ पर एक किराना की दूकान भी थी। जिस समय रिचर्ड अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे तो उस दौरान वह अपनी जरूरत का समान किराना की  दुकान से उधार के रूप में करते थे। क्योंकि उस समय रिचर्ड इतने पैसे नहीं होते थे जिससे वह अपनी जरूरतों का सामान आसानी से खरीद सके।

दिल्ली पहुँचकर प्रधानमंत्री मोदी से मिले रिचर्ड

हाल ही रिचर्ड जोकि वर्तमान समय में केन्या के मंत्री है वह प्रधानमंत्री से मुलाकात करने दिल्ली में आए है। दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के बाद वह औरंगाबाद के लिए रवाना हो गए। तथा ताज होटल में जाकर उन्हें आराम किया। जिसके बाद वह किराना दूकान के उस दुकानदार की तलाश करते - करते  वानखेड़े नगर पहुँच गए। जहाँ वह रहता था। उस दुकानदार का नाम काशीनाथ था। रिचर्ड काशीनाथ से मिले तथा उन्हें 200 रूपये के बदले 19,000/- रूपये दिए।

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