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ईरान में CIA का मास्टरस्ट्रोक: मौत के मुँह से ऐसे बचा अमेरिकी एयरमैन

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ईरान में CIA का मास्टरस्ट्रोक: मौत के मुँह से ऐसे बचा अमेरिकी एयरमैन

क्या आप भी ऐसा मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सैन्य इतिहास में कुछ ऑपरेशन (CIA Deception Campaign Iran News in Hindi) ऐसे होते हैं जो हॉलीवुड की किसी फिल्म से भी ज्यादा रोमांचक लगते हैं। हाल ही में ईरान के पहाड़ी इलाकों में फँसे एक अमेरिकी एयरमैन को बचाने के लिए चलाया गया मिशन भी कुछ ऐसा ही था।

विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि इस ऑपरेशन ने न केवल अमेरिकी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि यह भी दिखाया कि आधुनिक युद्ध में खुफिया एजेंसी CIA की भूमिका कितनी निर्णायक हो सकती है।

कैसे शुरू हुई मुश्किलें?

ईरान-अमेरिका युद्ध से जुड़ीं खबरों के अनुसार, संकट की शुरुआत तब हुई जब शुक्रवार को दक्षिण ईरान के ऊपर उड़ान भर रहे एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान को ईरानी सेना ने मार गिराया। ऐसा कहा जा रहा है कि पिछले 20 वर्षों में यह पहली बार था जब दुश्मन की गोलाबारी में किसी अमेरिकी फाइटर जेट को गिरते हुए देखा गया।

इस अमेरिकी लड़ाकू विमान में दो लोग सवार थे। जब विमान गिरा, तो दोनों पैराशूट की मदद से बाहर निकल आए। पायलट को तो रेस्क्यू टीम ने तुरंत ढूंढ लिया, लेकिन उनका दूसरा साथी लापता हो गया।

ईरान का इनाम और सैनिक की बचने की ट्रेनिंग

हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि जैसे ही यह खबर फैली, ईरान ने अमेरिकी अधिकारी को जिंदा पकड़ने के लिए करीब 62 लाख रुपये के इनाम की घोषणा कर दी। ईरान की इस घोषणा के बाद, सोशल मीडिया पर हथियारबंद नागरिकों के उसे ढूंढने के वीडियो वायरल होने लगे।

दूसरी ओर, दुश्मन के इलाके में फँसे एयरमैन ने अपनी ट्रेनिंग का बखूबी इस्तेमाल किया। वह एक हैंडगन के साथ पहाड़ की एक तंग दरार में छिप गया। उसने अपने बीकन सिग्नल का इस्तेमाल बहुत ही सीमित रखा, ताकि ईरानी सेना उसके रेडियो सिग्नल को ट्रैक न कर सके।

CIA का लोकेशन ट्रैकिंग और भ्रामक अभियान

इस रेस्क्यू मिशन में सीआईए (CIA) ने पर्दे के पीछे से सबसे अहम भूमिका निभाई। इतना ही नहीं, सीआईए के जासूसों और तकनीकी टीम ने एयरमैन की सटीक लोकेशन को ट्रैक किया और यह खुफिया जानकारी पेंटागन को दी।

ख़बरों के अनुसार, सीआईए ने ईरान के भीतर एक भ्रामक अभियान भी चलाया। उन्होंने यह अफवाह फैला दी कि अमेरिकी सेना ने लापता एयरमैन को पहले ही ढूंढ लिया है और वह सुरक्षित बाहर निकल चुका है। इस चाल का मकसद ईरानी सैनिकों का ध्यान भटकाना था ताकि असली रेस्क्यू टीम को समय मिल सके।

रेस्क्यू ऑपरेशन में हुआ दुनिया के सबसे घातक हथियारों का इस्तेमाल

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने अपने बहादुर योद्धा को वापस लाने के लिए कई घातक विमान भेजे थे। जब स्पेशल फोर्सेज एयरमैन की ओर बढ़ रही थीं, तो ईरानी सेना को दूर रखने के लिए अमेरिकी विमानों ने भारी बमबारी और फायरिंग भी की थी।

दुनियाभर के कई विशेषज्ञों का ऐसा कहना है कि यह मिशन बेहद जटिल था। रिपोर्टों के अनुसार, बचाव दल को निकालने के लिए भेजे गए दो ट्रांसपोर्ट विमान ईरान के एक दूरदराज बेस से उड़ान नहीं भर सके। उन्हें दुश्मन के हाथ लगने से बचाने के लिए नष्ट करना पड़ा।

ईरान का दावा बनाम अमेरिकी हकीकत

दोनों ही देश इस समय इस मिशन को लेकर विभिन्न प्रकार की बयानबाजी कर रहे हैं। जहाँ अमेरिका इस मिशन को एक बड़ी सफलता बता रहा है, वहीं ईरान ने इसे विफल ऑपरेशन करार दिया। इस मिशन को लेकर ईरान की सेना का दावा है कि उन्होंने अमेरिका के दो C-130 विमान और दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर नष्ट कर दिए और अमेरिका की यह घुसपैठ पूरी तरह विफल रही।

जबकि, अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात की पुष्टि की है कि एयरमैन को सुरक्षित बचाकर कुवैत ले जाया गया है। रिटायर्ड एडमिरल विलियम फैलन के अनुसार, रात का अंधेरा अमेरिका के काम आया, क्योंकि अमेरिकी सैनिक रात में ऑपरेशन करने में माहिर होते हैं।

निष्कर्ष

माना कि इस रेस्क्यू में अमेरिका को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और विमान नष्ट हुए, पर उनके लिए एक सैनिक की जान की कीमत सबसे ऊपर है। जनरल मैकेंजी का कहना है कि विमान तो दोबारा बन सकते हैं, पर अपने जांबाज को दुश्मन के इलाके में न छोड़ने का जज्बा सदियों में पैदा होता है। यही वजह है कि अमेरिका अपने एक-एक जवान के लिए पूरी दुनिया से लड़ने को तैयार रहता है।

अक्सर आपके द्वारा पूछे गए प्रश्न (FAQs)

प्रश्न :  इस मिशन में बचाए गए अमेरिकी अधिकारी की पहचान क्या है?

उत्तर : सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए, तक अमेरिकी सेना ने अधिकारी के नाम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन वे एक वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर (WSO) और कर्नल रैंक के अधिकारी बताए जा रहे हैं।

प्रश्न :  क्या इस पूरे ऑपरेशन में किसी की जान गई?

उत्तर : इस पूरे ऑपरेशन को लेकर अमेरिकी अधिकारियों का यह कहना है कि इस पूरे रेस्क्यू मिशन के दौरान किसी भी अमेरिकी सैनिक या बचाव दल के सदस्य की मौत नहीं हुई।

प्रश्न :  अमेरिका ने अपने ही विमानों को क्यों नष्ट कर दिया?

उत्तर : रेस्क्यू के दौरान दो अमेरिकी C-130 ट्रांसपोर्ट विमान तकनीकी खराबी के कारण उड़ान नहीं भर सके। उन्हें वहीं छोड़कर आने पर खतरा था कि ईरान उनकी तकनीक और खुफिया जानकारी चुरा लेगा, इसलिए अमेरिकी सेना ने उन्हें खुद ही धमाके से उड़ा दिया।

प्रश्न :  घायल एयरमैन को बचाने के बाद कहाँ ले जाया गया?

उत्तर : रेस्क्यू के तुरंत बाद एयरमैन को प्राथमिक उपचार के लिए कुवैत में स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेस पर ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

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