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बारामती प्लेन क्रैश: जब नंबर 11 बना किस्मत और क़यामत – जाने पूरी कहानी

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बारामती प्लेन क्रैश: जब नंबर 11 बना किस्मत और क़यामत – जाने पूरी कहानी

28 जनवरी 2026 को बारामती विमान हादसे में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया है। अजित पवार अपने विमान में बैठकर महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से बारामती के लिए जा रहे थे। लैंडिंग करते समय अजित पवार के विमान ने अपना संतुलन खो दिया था, जिसके बाद विमान जमीन पर जा गिरा। यह हादसा इतना भयानक था कि पल भर में सब कुछ खत्म हो गया था।

हादसे के बाद सबके मन यह सवाल है कि आखिर अंतिम तीन मिनट में ऐसा क्या हुआ? जिसनें एक समान्य लैंडिंग को एक भयानक हादसे का रूप में बदल दिया।

अहमदाबाद प्लेन क्रैश की सीट 11A का चमत्कार

आपको पिछले वर्ष यानी कि 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए देश के दूसरे सबसे बड़े प्लेन हादसे के बारें में तो पता ही होगा। करीबन सात महीने पहले हुए इस अहमदाबाद प्लेन हादसे में 241 यात्रियों की मौत हो गई थी। इस प्लेन हादसे में सिर्फ एक यात्री ही चमत्कारिक रूप से बच पाया था।

इस यात्री का नाम कुमार रमेश है। यह अहमदाबाद प्लेन की 11A सीट पर बैठा था, जिसे सबसे सुरक्षित सीट माना जाता है। अहमदाबाद में विमान टेकऑफ के तुरंत बाद गिर गया था और ईंधन से भरे होने के कारण आग का विशाल गोला बन गया था।

हाल ही में, महाराष्ट्र के बारामती में हुआ हादसा भले टेकऑफ के समय नहीं हुआ, लेकिन इसकी गंभीरता उतनी ही भयावह थी।

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उड़ान से लेकर हादसे तक की पूरी टाइमलाइन

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार सुबह के करीबन 8:10 मिनट पर अपने विमान में बैठकर मुंबई के रवाना हुए थे। अजित पवार के विमान की उड़ान समान्य थी और विमान निरंतर पुणे एटीसी और फिर बारामती एटीसी के संपर्क में बना हुआ था। समस्या शुरू हुई तब, जब विमान को बारामती में उतरना था।

बारामती की हवाई पट्टी एक छोटी और टेबलटॉप रनवे है। बारामती में बना यह रनवे चारों ओर से ऊबड़-खाबड़ इलाके के बीच ऊंचाई पर बना हुआ है, जिस कारण से इस जगह लैंडिंग करना बहुत अधिक जोखिम भरा मन जाता है।

अजित पवार का विमान सुबह 8:18 बजे बारामती के रनवे का करीब पहुँचा था। इस समय विजिबिलिटी बहुत ही कम थी। ऐसे में विमान को लैंडिंग करने में बहुत परेशानी हो रही थी। एटीसी ने पायलट से पूछा कि क्या रनवे दिखाई दे रहा है। रनवे साफ न दिखने पर एटीसी ने पायलट को गो-अराउंड यानी एक चक्कर लगाने के निर्देश दिए, ताकि वह दोबारा सुरक्षित तरीके से लैंडिंग की कोशिश कर सके।

आखिर क्यों बारामती में नंबर 11 बना विनाश का कारण

सुबह के लगभग 8 बजकर 43 मिनट पर, एटीसी द्वारा विमान को दोबारा लैंडिंग की अनुमति दी गई थी। इस बार पायलट ने बताया कि उन्हें रनवे दिखाई दे रहा है। सब कुछ सामान्य लग रहा था और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि विमान सुरक्षित उतर जाएगा।

सबकुछ समान्य चल रहा था, लेकिन 8 बजकर 45 मिनट पर अजित पवार के विमान को रनवे नंबर 11 पर उतरना था। रनवे पर लैंडिंग की कोशिश के दौरान विमान ने अपना संतुलन खो दिया था। टेबलटॉप रनवे होने की वजह से जरा-सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती थी। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का विमान रनवे से लगभग 50 मीटर पहले ही करीब 100 फीट नीचे खाईं में जा गिरा।

विमान के खाई में गिरते ही तेज धमाका हुआ, जिसके बाद उसमें इतनी भीषण आग लग गई थी। विमान में लगी आग की लपटे इतनी ज्यादा थी कि किसी भी व्यक्ति का विमान से निकलना नमुमकिन था। कोई इमरजेंसी सिग्नल या मेडे कॉल सामने नहीं आया, जिससे साफ होता है कि पायलट को प्रतिक्रिया का मौका ही नहीं मिला।

सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों की गवाही

अजित पवार के विमान के हादसे का सीसीटीवी फुटेज सामने आ गया है, जिसमें साफ दिखाई देता है कि विमान के जमीन पर गिरते ही तेज धमाका हुआ और आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका धुएं से भर गया था।

चश्मदीदों के अनुसार, विमान को कम ऊंचाई पर उड़ते देख उन्हें इस बात का अंदेशा हो गया था कि कुछ गड़बड़ है। लोगों ने बाल्टियों से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि कुछ भी करना संभव नहीं था। कुछ ही मिनटों में ही अजित पवार का विमान जलकर खाक हो गया था।

हादसा इतना भयानक था कि विमान तीन टुकड़ों में टूट गया था। इस विमान में मौजूद सभी व्यक्तियों के शव बुरी तरह झुलस चुके थे। अजित पवार की पहचान उनके हाथ की घड़ी से की गई थी। विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई।

विमान और क्रू की जानकारी

यह विमान VSR वेंचर्स लिमिटेड का लियर जेट 45 (बॉम्बार्डियर) था।

  • विमान करीब 12 साल पुराना था
  • वजन लगभग 10 हजार किलो
  • अधिकतम गति 900 किमी/घंटा
  • 2 पायलट समेत अधिकतम 9 यात्री सवार हो सकते हैं

अजित पवार के विमान को उड़ा रहे पायलट कैप्टन सुमित कपूर के पास 16,000 घंटे का उड़ान अनुभव था, जबकि को-पायलट शांभवी पाठक के पास 1,500 घंटे का अनुभव था।

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