मार्किट वोलैटिलिटी में लॉन्ग‑टर्म निवेश क्यों जरूरी है?
Market Volatility and Long Term Investing in India : शेयर बाजार या किसी भी अन्य निवेश बाजार में वोलैटिलिटी (अस्थिरता) एक आम बात है। इसका मतलब यह है कि जब आप निवेश की कीमतों को अधिक ऊपर‑नीचे होते हुए देख रहे हैं तो समझ जाए कि इस समय मार्किट में वोलैटिलिटी यानी की अस्थिरता बनी हुई है।
हमेशा से ही भारत जैसे प्रमुख उभरते बाजार में यह उतार‑चढ़ाव निवेशकों के लिए चिंता का कारण रहा है, लेकिन जो व्यक्ति लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करता है उसे अधिक परेशान होने की ज़रुरत नहीं है। आखिर क्यों मार्किट की अस्थिरता के बावजूद लंबे समय के निवेश का रुझान आपके लिए लाभपूर्ण होता है? आज हम आपको इसे सरल शब्दों में समझाने की कोशिश करेंगे।
Market Volatility and Long Term Investing in India
वोलैटिलिटी क्या है?
जब भी मार्किट में अधिक वोलैटिलिटी दिख रही है तो इससे पता चलता है कि निवेश की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। इतना ही नहीं, यदि स्टॉक या बाजार के सूचकांक की कीमत बहुत तेजी से ऊपर‑नीचे होती है, तो इसे उच्च वोलैटिलिटी कहा जाता है।
यदि आपको कभी मार्किट में निवेश की कीमतों में तेज बदलाव होता हुआ नहीं दिख रहा हो, तो समझ जाए कि इस समय वोलैटिलिटी बहुत कम है। आम तौर पर यह उतार‑चढ़ाव आर्थिक रिपोर्ट, कंपनी के परिणाम, वैश्विक घटनाएँ या निवेशकों की भावना बदलने से आते हैं।
यदि आप भारत में मार्किट की वोलैटिलिटी का पता लगाना चाहते है तो आप India VIX (वोलैटिलिटी इंडेक्स) के ज़रिए आसानी से पता लगा सकते हैं। आप इस वेबसाइट से मार्किट में आने वाले 30 दिनों में संभावित उतार‑चढ़ाव को देख सकते हैं। जब VIX उच्च होता है, तब निवेशकों को अधिक अस्थिरता का अंदेशा होता है, लेकिन जब यह कम होता है, तो उस समय बाजार स्थिर दिखता है।
क्यों मार्किट की वोलैटिलिटी डराती है?
ऐसा बहुत बार देखा गया है कि जब मार्किट में अचानक गिरावट होती है तो इस स्थिति को देखकर निवेशक घबरा जाते हैं। मार्किट में गिरावट होने से निवेशकों को लगता है कि इस समय बाजार में निवेश करना सुरक्षित है। इसलिए निवेशक अपनी निवेश की गई धनराशि को निकाल लेते हैं। इस प्रकार का फैसले से लेने से निवेशक ज्यादातर नुकसान में रहते हैं। कम कीमत पर बेचने की वजह से आप लंबी अवधि में मिलने वाले लाभ से वंचित रह जाते हैं।
आपको पता होना चाहिए कि वोलैटिलिटी का कारण सिर्फ बाजार की भावनाओं का उथल‑पुथल होना नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई आर्थिक और बाहरी कारक भी काम करते हैं। जैसे आर्थिक डेटा, कंपनी के मुनाफे का रिपोर्ट, नीतिगत बदलाव, वैश्विक घटनाएँ और ट्रेडिंग मॉडल बाजार की कीमतों को प्रभावित करती हैं।
लॉन्ग‑टर्म निवेश का मतलब क्या है?
लॉन्ग‑टर्म निवेश का अर्थ होता है। आप आपनी निवेश की गई धनराशि को बाजार में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण भी लंबे समय तक होल्ड करके रखते हैं। उदाहरण के लिए अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं और उसे 5, 10 या उससे भी ज्यादा सालों तक बिना बेचें रखते हैं, तो वह लॉन्ग‑टर्म निवेश माना जाता है।
वॉरेन बफेट जैसे अनुभवी निवेशकों का भी यह मानना है कि मार्केट में वोलैटिलिटी तो हमेशा रहेगी, लेकिन लॉन्ग‑टर्म निवेशक वही हैं जो भावनात्मक निर्णय के बजाय शांत दिमाग से निवेश को बनाए रखते हैं, क्योंकि समय के साथ बाजार तेज गति से ऊपर की ओर बढ़ता है। जिसका लाभ केवल वो निवेशक ही उठा पता है जिसमें अपने निवेश को होल्ड करके रखा था।
भारत में लॉन्ग‑टर्म निवेश के क्या फायदे हैं?
कई बार वैश्विक उतार‑चढ़ाव का भारत की अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ता है, बल्कि इस स्थिति में भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहती है। रिकार्ड्स के अनुसार, भारत की GDP ग्रोथ दर बाकी दुनिया की तुलना में स्थिर और अधिक मजबूत है, जिससे लॉन्ग‑टर्म निवेश के अवसर मजबूत बनते हैं।
लॉन्ग‑टर्म के लिए निवेश करने से आप बहुत बड़ा फायदा उठा सकते हैं। समय के साथ कंपाउंडिंग (प्रतिफल का जोड़ना) निवेश को और भी बढ़ा देती है। जैसे‑जैसे समय बढ़ता है, निवेश का मूल धन बढ़ता है और उस पर मिलने वाला लाभ भी बढ़ता जाता है।
वोलैटिलिटी के दौरान खुद को शांत किस रखें?
- भावनाओं को नियंत्रण में रखें: बाजार की गिरावट या उछाल से डर कर बेचने के बजाय एक ठंडे दिमाग से योजना बनाएं। ताकि आप अधिक नुकसान से खुद को बचा सकें।
- लॉन्ग‑टर्म सोच रखें: याद रखें कि इतिहास दर्शाता है कि बाजार समय के साथ ऊपर की ओर बढ़ता है और अस्थिरता अस्थायी होती है।
- डायवर्सिफिकेशन अप्नाएँ: आपको अपने निवेश की गई धनराशि को विभिन्न क्षेत्रों, जैसे शेयर, म्यूचुअल फंड और बॉन्ड में बांटें ताकि जोखिम कम हो।
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FAQs –
1. मार्केट वोलैटिलिटी क्या है?
उत्तर- बाजार में कीमतों का तेज़ ऊपर-नीचे होना।
2. क्या वोलैटिलिटी से डरना चाहिए?
उत्तर- नहीं, यह बाजार का सामान्य हिस्सा है।
3. लॉन्ग-टर्म निवेश क्या होता है?
उत्तर- 5 साल या उससे ज़्यादा समय के लिए निवेश।
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