China Role in Iran Ceasefire: ट्रंप का बड़ा खुलासा, चीन ने रुकवाया युद्ध!

आपको यह बात जानकार हैरानी होगी कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के युद्धविराम (China Role in Iran Ceasefire News in Hindi) में अब चीन की बड़ी भूमिका सामने आई है। खबरों के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि चीन की वजह से ही ईरान बातचीत के लिए तैयार हुआ है, जबकि इससे पहले समझौते के लिए पाकिस्तान की चर्चा हो रही थी।
सोचने वाली बात यह है कि जहाँ एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देने के बाद अचानक शांति का रास्ता चुना और यूरेनियम संबंधी चिंताओं को दूर करने का भरोसा दिया है, वहीं चीन ने भी इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि वह मध्य पूर्व में सुरक्षा बहाली के लिए सक्रिय रहेगा।
आपको क्या लगता है, क्या इस घटनाक्रम के पीछे चीन और पाकिस्तान की संयुक्त मध्यस्थता ने काम किया है? जिससे अब इस क्षेत्र में युद्ध का खतरा टलता नजर आ रहा है।
पाकिस्तान के बाद अब चीन की एंट्री
ताजा खबरों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'ट्रुथ सोशल' के माध्यम से ईरान के साथ दो हफ़्ते के युद्धविराम का ऐलान किया है।
दिलचस्प बात यह है कि जहाँ ट्रंप ने इस ऐतिहासिक फैसले का शुरुआती श्रेय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ हुई अपनी गंभीर चर्चा को दिया, वहीं बाद ट्रंप ने एएफ़पी से बातचीत में यह मान लिया कि युद्धविराम कराने में चीन ने अहम भूमिका निभाई है।
एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से यह सवाल किया गया है कि क्या ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने के लिए चीन की भूमिका है?
इस सवाल का ‘हाँ’ में जवाब देते हुए उन्होंने कहा है कि चीन ने ही ईरान को बातचीत के लिए तैयार किया है। जिसके बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम के लिए ऐलान किया है। बहुत कम लोग जानते हैं कि अब सबकी निगाहें ट्रंप की अगले महीने होने वाली बीजिंग यात्रा पर टिकी हैं, जहाँ वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाक़ात कर इस युद्धविराम को एक स्थायी समझौते के रूप में बदल सकते हैं।
ट्रंप के दावे पर चीन की पहली प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग के रुख को स्पष्ट किया है।
खास बात यह है कि बीजिंग की इस कूटनीतिक सक्रियता का सबूत देते हुए उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से चीनी विदेश मंत्री वांग यी संबंधित देशों के साथ 26 बार उच्च स्तरीय फोन वार्ता कर चुके हैं। इसके अलावा, चीन के विशेष दूतों ने भी क्षेत्र के निरंतर दौरे किए हैं, जिससे यह साफ़ है कि चीन पर्दे के पीछे से शांति और युद्ध रोकने के लिए आक्रामक रूप से काम कर रहा है।
चीन की कूटनीति और भारत का संदर्भ
- राजदूत का खुलासा: भारत में चीन के राजदूत शू फ़ेहॉन्ग ने बताया कि विदेश मंत्री वांग यी ने अब तक 26 बार विभिन्न देशों से फोन पर चर्चा की है।
- लिस्ट से गायब नाम: दिलचस्प बात यह है कि चीन की इस आधिकारिक संपर्क सूची में भारत और अमेरिका दोनों के नाम शामिल नहीं हैं।
युद्धविराम के मुख्य आधार
नीचे दी गई टेबल से समझिए कि दोनों पक्ष इस समझौते को किस नज़रिए से देख रहे हैं:
| विवरण | डोनाल्ड ट्रंप का दावा (अमेरिका) | ईरान की शर्तें (SNSC के अनुसार) |
| मुख्य प्रस्ताव | ईरान से 10 बिंदुओं का प्रस्ताव मिला है। | अमेरिका आक्रामक कार्रवाई न करने की गारंटी दे। |
| होर्मुज़ स्ट्रेट | ईरान इसे पूरी तरह खोलने पर सहमत हो गया है। | होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रहेगा। |
| परमाणु मुद्दा | यूरेनियम संवर्धन का पूरा ध्यान रखा जाएगा। | यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को मान्यता मिले। |
| प्रतिबंध & मुआवज़ा | विवाद के लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। | सभी प्रतिबंध हटाए जाएं और ईरान को हर्जाना दिया जाए। |
| सैन्य स्थिति | 2 हफ्ते का समय समझौते को अंतिम रूप देने के लिए है। | क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी हो। |
क्या हैं ईरान की अतिरिक्त मांगें?
युद्धविराम को स्थायी बनाने के लिए ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) ने कुछ और सख्त शर्तें रखी हैं, जिसे निम्न प्रकार से समझाया गया है:
- UN & IAEA: संयुक्त राष्ट्र और परमाणु ऊर्जा एजेंसी के पुराने सभी प्रस्तावों को खत्म करना।
- लेबनान मोर्चा: लेबनान में सक्रिय इस्लामिक रेज़िस्टेंस के खिलाफ सभी सैन्य कार्रवाइयों पर तुरंत रोक लगाना।
- सुरक्षा गारंटी: अमेरिका भविष्य में कभी भी दोबारा हमला न करने का लिखित आश्वासन दे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
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