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लिव-इन रिलेशनशिप पर क्या कहता है भारत का कानून?

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लिव-इन रिलेशनशिप पर क्या कहता है भारत का कानून?

Live in Relationship is Legal or Not in India: भारत आज के समय में काफी तेजी के साथ आधुनिकता की तरफ बढ़ रहा है। समय के साथ-साथ यहाँ के समाज के लोगों का नजरिया भी काफी आधुनिक हुआ है। पुराने दौर में जहाँ बिना शादी के साथ रहना एक सामाजिक बुराई माना जाता था, वहीं आज की पीढ़ी इसे एक-दूसरे के साथ रहने का जरिया मानती है।

लेकिन आज की पीढ़ी के मन में सबसे बड़ा सवाल जो आता है, वह यह है कि live in relationship is legal or not in india? क्या पुलिस या समाज आपको इस आधार पर परेशान कर सकता है? चलिए आज विस्तार से और बहुत आसान शब्दों में इस पर चर्चा करते हैं।

Live in Relationship is Legal or Not in India

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर इस विषय पर बहुत स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। कानून का मानना है कि यदि दो वयस्क अपनी मर्जी से एक साथ रहना चाहते हैं, तो यह उनका निजी फैसला है।

इसलिए अगर आप इस उलझन में हैं कि live in relationship is legal or not in india, तो इसका सीधा जवाब है कि कानून की नजर में यह पूरी तरह वैध है।

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए क्या हैं जरूरी शर्तें?

भले ही कानून इसकी इजाजत देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसमें कोई नियम नहीं हैं। कोर्ट ने कुछ शर्तें तय की हैं ताकि इस रिश्ते का दुरुपयोग न हो, जैसे-

  1. उम्र का सही होना: पुरुष की उम्र 21 वर्ष और महिला की 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। नाबालिगों का साथ रहना अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
  2. स्वेच्छा और सहमति: दोनों पार्टनर अपनी मर्जी से साथ रह रहे हों। अगर किसी को डरा-धमका कर साथ रखा जाता है, तो वह अवैध होगा।
  3. शादी जैसा रिश्ता: केवल कुछ दिनों के लिए साथ रहना लिव-इन नहीं कहलाता। कानून की नजर में आपको समाज के सामने एक कपल की तरह रहना चाहिए, जैसे कि आप पति-पत्नी हों।
  4. वैधानिक स्थिति: यदि कोई पहले से शादीशुदा है और बिना तलाक लिए किसी और के साथ रहता है, तो उसे कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में अक्सर कोर्ट सुरक्षा देने से मना कर देता है क्योंकि live in relationship is legal or not in india यह सवाल आपकी वैवाहिक स्थिति पर भी निर्भर करता है।

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महिलाओं के लिए कानूनी सुरक्षा कवच

अक्सर यह चिंता जताई जाती है कि अगर रिश्ता टूट गया तो महिला का क्या होगा? भारतीय कानून ने महिलाओं को यहाँ भी सुरक्षा दी है:

  • घरेलू हिंसा से बचाव: लिव-इन में रहने वाली महिला डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट 2005 के तहत सुरक्षा मांग सकती है। उसे घर से बाहर नहीं निकाला जा सकता और मारपीट या मानसिक प्रताड़ना पर वह केस कर सकती है।
  • भरण-पोषण: यदि पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो वह धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता मांग सकती है, बशर्ते रिश्ता लंबे समय तक चला हो। 

बच्चों का भविष्य और उनका अधिकार

लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चों को लेकर अक्सर लोग भ्रमित रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि ऐसे बच्चों को नाजायज नहीं कहा जा सकता। वे पूरी तरह से वैध हैं और उन्हें अपने माता-पिता की संपत्ति में उत्तराधिकार का पूरा अधिकार है।

इन बच्चों के बारे में समाज चाहे जो कुछ भी कहे, कानून इन बच्चों को वही दर्जा देता है जो शादीशुदा जोड़ों के बच्चों को मिलता है।

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लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन और नए कानून

वर्तमान समय में भारत के कुछ राज्यों ने नियमों को और अधिक स्पष्ट और सख्त बना दिया है। उदाहरण के लिए उत्तराखंड जैसे राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू होने के बाद अब लिव-इन में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य हो गया है।

  • रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया: जोड़ों को एक सरकारी पोर्टल पर अपनी जानकारी देनी होती है।
  • सुरक्षा का पहलू: रजिस्ट्रेशन का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है ताकि किसी भी पार्टनर के साथ धोखाधड़ी न हो।
  • अनिवार्यता: यदि आप बिना रजिस्ट्रेशन के साथ रहते हैं, तो जुर्माना या सजा का प्रावधान भी किया गया है। इसलिए आज के दौर में यह जानना कि live in relationship is legal or not in india, आपको स्थानीय राज्य के नियमों को भी समझने पर मजबूर करता है।

क्या आपको डरने की जरूरत है?

अगर आप बालिग हैं और आपसी सहमति से साथ रह रहे हैं, तो भारत का संविधान आपको सुरक्षा प्रदान करता है। पुलिस या कोई भी बाहरी व्यक्ति आपको सिर्फ साथ रहने के कारण परेशान नहीं कर सकता। हालांकि समय के साथ बदलते नियमों का पालन करना अब जरूरी हो गया है।

इसलिए किसी भी रिश्ते की नींव हमेशा भरोसे और सम्मान पर टिकी होती है। कानून आपको साथ रहने की आजादी तो देता है, लेकिन साथ ही समाज के प्रति आपकी जिम्मेदारी भी तय करता है। अगर आप जागरूक हैं, तो आपके अधिकारों को कोई नहीं छीन सकता।  

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FAQs

1. क्या भारत में बिना शादी के एक साथ रहना कानूनी अपराध है?

उत्तर- नहीं, भारत में लिव-इन रिलेशनशिप पूरी तरह कानूनी है। यदि दो बालिग अपनी मर्जी से साथ रहते हैं, तो यह कोई अपराध नहीं है।

2. क्या लिव-इन में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है?

उत्तर- वर्तमान में उत्तराखंड जैसे कुछ राज्यों में UCC के तहत रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।

3. क्या लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चे को पिता की संपत्ति में हक मिलता है?

उत्तर- हाँ, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार लिव-इन से पैदा हुए बच्चे पूरी तरह वैध माने जाते हैं।

4. क्या लिव-इन पार्टनर अलग होने पर गुजारा भत्ता मांग सकती है?

उत्तर- हाँ, यदि रिश्ता लंबे समय तक चला है और महिला आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है, तो वह घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत अपने पार्टनर से भरण-पोषण का दावा कर सकती है।

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