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ईरान-इजरायल जंग: पीएम मोदी ने बुलाई हाई लेवल सुरक्षा बैठक

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ईरान-इजरायल जंग: पीएम मोदी ने बुलाई हाई लेवल सुरक्षा बैठक

Iran-Israel War News In Hindi: पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों के बीच कई देशों ने आपात बैठकें की हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हालात की समीक्षा के लिए एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई।

यह मीटिंग नई दिल्ली में हुई, जिसमें देश की सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़ें कई बड़े अधिकारी भी शामिल हुए। दुनिया के कई हिस्सों में तनाव बढ़ने से भारत पर भी इसका असर पड़ सकता है। मध्य पूर्व भारत के लिए ऊर्जा, व्यापार और वहाँ पर काम कर रहे लाखों भारतीय नागरिकों के कारण बहुत महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है। इसलिए भारत सरकार भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।  

कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अहम बैठक

प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक की अध्यक्षता की। इस मीटिंग में रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, विदेश मंत्री और वित्त मंत्री जैसे वरिष्ठ मंत्री भी शामिल हुए। मीटिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और अन्य बड़े अधिकारी भी मौजूद रहे। इस बैठक में तीन मुख्य मुद्दों पर चर्चा हुई-

  1. पश्चिम एशिया की ताजा सुरक्षा स्थिति
  2. वहाँ रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा
  3. तेल आपूर्ति और व्यापार पर संभावित असर

सरकार ने संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वे क्षेत्र में मौजूद भारतीय दूतावासों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें और जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता प्रदान करें।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

सरकार के अनुसार पश्चिम एशिया के देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय को निर्देश दिए गए हैं कि वह स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहे और भारतीयों के लिए हेल्पलाइन सक्रिय रखे।

यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो सुरक्षित निकासी (इवैक्यूएशन) की योजना भी तैयार रखी जाएगी। सरकार पहले भी संकट के समय अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के अभियान चला चुकी है, इसलिए इस बार भी पूरी तैयारी रखने पर जोर दिया गया है।

पीएम मोदी ने की इजरायल के प्रधानमंत्री से बातचीत

इस बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और स्थिति को जल्द शांत करने की जरूरत पर जोर दिया।

भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। भारत ने साफ किया है कि वह शांति और स्थिरता का समर्थक है और किसी भी प्रकार की हिंसा से आम लोगों को नुकसान नहीं होना चाहिए।

भारत की संतुलित विदेश नीति

भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया के देशों के साथ संतुलित और मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखता आया है। भारत के ईरान और इजरायल दोनों देशों के साथ राजनयिक और आर्थिक संबंध हैं। ऐसे में भारत का रुख संतुलित और जिम्मेदारीपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव लंबे समय तक चलता है, तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। भारत, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर है, इस स्थिति पर गंभीरता से नजर रखे हुए है।

क्या होगी आगे की रणनीति?

बैठक के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि स्थिति की लगातार निगरानी की जाएगी। सभी संबंधित एजेंसियों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि भारतीय नागरिकों को आधिकारिक सलाह का पालन करना चाहिए और अफवाहों से बचना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने शांति, संवाद और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है। भारत की कोशिश है कि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे और वहाँ रह रहे भारतीय सुरक्षित रहें। पीएम मोदी की इस हाई लेवल मीटिंग से पता चलता है कि वैश्विक संकट की स्थिति में भारत अपनी सजग, सतर्क और जिम्मेदार भूमिका निभा रहा है।

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FAQs

1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह उच्चस्तरीय बैठक क्यों बुलाई?

उत्तर- ईरान-इजरायल तनाव की स्थिति की समीक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए।

2. बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा क्या था?

उत्तर- पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात और वहाँ रह रहे भारतीयों की सुरक्षा।

3. भारत ने इस मामले में क्या रुख अपनाया है?

उत्तर- भारत ने शांति, संयम और बातचीत के जरिए समाधान की अपील की है।

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