पीएम मोदी आज करेंगे ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ का उद्घाटन
PM Modi Inaugurate Seva Teerth and Kartavya Bhavan: आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में बेहद खास है। आपको बता दें कि करीब एक सदी से जो रायसीना हिल्स और साउथ ब्लॉक देश की सत्ता और ताकत का प्रतीक माने जाते थे, आज से वह इतिहास बनने जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने नए दफ्तर में प्रवेश करेंगे। लेकिन खास बात यह है कि इस नई इमारत को सिर्फ एक दफ्तर नहीं, बल्कि सेवा तीर्थ का नाम दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह नाम इसलिए चुना गया है ताकि यह याद रहे कि यहाँ बैठने वाले लोग शासक नहीं, बल्कि जनता के सेवक हैं।
PMO का नया नाम होगा सेवा तीर्थ
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आज दोपहर करीब 1:30 बजे प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले इस नए परिसर के नाम सेवा तीर्थ का अनावरण करेंगे। इसके बाद शाम को एक बड़ा कार्यक्रम होगा। शाम 6 बजे पीएम मोदी औपचारिक रूप से सेवा तीर्थ के साथ-साथ दो और विशाल इमारतों कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 का उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर वह देश को संबोधित भी करेंगे और बताएंगे कि कैसे ये नई इमारतें भारत के काम करने के तरीके को बदल देंगी।
आखिर क्या है सेवा तीर्थ?
सेवा तीर्थ वह नया परिसर है जहाँ अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) लगेगा। यह पुरानी साउथ ब्लॉक बिल्डिंग से एकदम अलग है। अभी तक पीएमओ, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय अलग-अलग जगहों पर थे। सेवा तीर्थ में ये तीनों एक ही छत के नीचे होंगे। जब सारे बड़े अधिकारी पास-पास बैठेंगे, तो फाइलों को घूमने में वक्त नहीं लगेगा और बड़े फैसले तुरंत लिए जा सकेंगे।
कर्तव्य भवन में कौन बैठेगा?
प्रधानमंत्री के दफ्तर के अलावा सरकार के कामकाज को सुचारू बनाने के लिए कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 बनाए गए हैं। अब तक दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर बिखरे मंत्रालय अब यहाँ शिफ्ट हो जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- वित्त मंत्रालय (Finance Ministry)
- रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry)
- गृह मंत्रालय (Home Ministry)
- विदेश मंत्रालय (External Affairs Ministry)
- शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अन्य अहम मंत्रालय।
पहले जिस काम के लिए फाइल को एक भवन से दूसरे भवन जाने में कई दिन लग जाते थे, अब वह काम मिनटों में हो सकेगा क्योंकि सभी मंत्रालय कर्तव्य भवन में आस-पास होंगे।
पुराने दफ्तरों को छोड़ना क्यों जरूरी था?
बहुत से लोगों के मन में सवाल होगा कि पुराने नॉर्थ और साउथ ब्लॉक तो बहुत मजबूत थे, फिर नए दफ्तर क्यों? आपको बता दें कि पुराने दफ्तर 100 साल पहले अंग्रेजों ने अपनी जरूरतों के हिसाब से बनाए थे। आज भारत बड़ा है और काम का बोझ भी ज्यादा है। वहाँ जगह कम पड़ रही थी।
पुरानी इमारतों में नए कंप्यूटर, सर्वर और केबल बिछाना मुश्किल था। नई इमारतें पूरी तरह से हाई-टेक हैं। पुरानी इमारतों को बार-बार रिपेयर करना पड़ता था, जो महंगा पड़ता था।
‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ की खासियत
नई इमारतों का यह नया निर्माण सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है और इसे भविष्य के भारत को ध्यान में रखकर बनाया गया है। ये इमारतें पर्यावरण के अनुकूल हैं। यहाँ सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होगा और पानी की बर्बादी रोकी जाएगी।
यहाँ कागज का इस्तेमाल कम से कम होगा। सब काम डिजिटल तरीके से होंगे। इसके अलावा जो लोग अपने काम से मंत्रालय आते हैं, उनके लिए अब अलग से साफ-सुथरे वेटिंग हॉल और रिसेप्शन बनाए गए हैं, ताकि उन्हें धूप या बारिश में बाहर न खड़ा रहना पड़े।
बदलते भारत की तस्वीर है सेवा तीर्थ
आज जब प्रधानमंत्री सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन करेंगे, तो यह संदेश साफ होगा कि भारत अब बदल रहा है। यह बदलाव सिर्फ इमारतों का नहीं, बल्कि काम करने की स्पीड और नीयत का भी है। सरकार का मकसद है कि दिल्ली के गलियारों में फाइलें अटकें नहीं, बल्कि तेजी से आगे बढ़ें ताकि देश के विकास को रफ्तार मिल सके।
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FAQs
1. प्रधानमंत्री के नए कार्यालय (PMO) का नाम क्या रखा गया है?
उत्तर- प्रधानमंत्री के नए कार्यालय भवन का नाम सेवा तीर्थ रखा गया है।
2. कर्तव्य भवन में कौन-कौन से मंत्रालय शिफ्ट होंगे?
उत्तर- कर्तव्य भवन में वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय जैसे सरकार के सभी प्रमुख विभाग शिफ्ट होंगे।
3. पीएम मोदी इन नए भवनों का उद्घाटन कब करेंगे?
उत्तर- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 फरवरी को शाम करीब 6 बजे सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।
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