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होर्मुज़ संकट: जयशंकर की कूटनीति ने बचाई भारत की गैस सप्लाई!

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होर्मुज़ संकट: जयशंकर की कूटनीति ने बचाई भारत की गैस सप्लाई!

India Iran Hormuz Strait News in Hindi : क्या आपको पता है कि दुनिया भर में ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता कहा जाने वाला 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य' इस समय वैश्विक राजनीति और तनाव का केंद्र बना हुआ है। जब पूरी दुनिया इस रास्ते को खोलने के लिए सैन्य विकल्प और युद्धपोतों की बात कर रही थी, तब भारत ने कूटनीति का एक नया रास्ता दिखाया है।

ख़बरों के अनुसार, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में ईरान के साथ हुई बातचीत और भारतीय टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही पर कई अहम खुलासे किए हैं।

India Iran Hormuz Strait News in Hindi

क्या है पूरा विवाद?

ऐसा बताया जाता है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच का एक संकरा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। बहुत कम लोगों को इस बारे में पता है कि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलएनजी (LNG) इसी रास्ते से गुजरता है।

बता दें कि हाल ही में ईरान द्वारा इस रास्ते पर कड़े नियंत्रण और तनाव के कारण वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आया है, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गया है।

भारत और ईरान के बीच क्या बनी सहमति?

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 'फाइनेंशियल टाइम्स' को दिए इंटरव्यू देते हुए यह कहा है कि फिलहाल, भारत और ईरान के बीच कोई 'स्थायी लिखित समझौता' नहीं हुआ है, बल्कि यह निरंतर चल रही बातचीत का नतीजा है।

  • सफलता: ऐसा कहा जा रहा है कि भारत की ईरान से हुई सीधी बातचीत के बाद शनिवार को भारतीय झंडे वाले दो बड़े गैस टैंकर होर्मुज़ स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने में सफल रहे हैं।
  • लेन-देन का अभाव: भारत के विदेश मंत्री ने इस बात को भी साफ किया कि इसके बदले ईरान को कुछ नहीं दिया गया है। यह कोई 'ट्रेड डील' नहीं है, बल्कि दोनों देशों के पुराने और ऐतिहासिक संबंधों का असर है।
  • केस-दर-केस आधार: ताजा खबरों के अनुसार, भारतीय जहाजों के लिए कोई सामान्य अनुमति नहीं मिली है। हर जहाज की आवाजाही पर अलग से बातचीत की जा रही है।

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भारत के लिए क्यों जरूरी है होर्मुज़?

सही मायने में, भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता की रसोई इस समुद्री रास्ते से सीधे जुड़ी हुई है, जिसे आप निम्नलिखित बिंदुओं से समझ सकते हैं जैसे कि :-

  • LNG आयात: भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलएनजी (LNG) आयात करता है।
  • खाड़ी देशों पर निर्भरता: इस आयात का 90% हिस्सा सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से आता है, जिसका एकमात्र रास्ता होर्मुज़ स्ट्रेट है।
  • घरेलू असर: रिकॉर्ड्स के अनुसार, भारत में करीब 33 करोड़ घर रसोई गैस (LPG) पर निर्भर हैं। पिछले कुछ दिनों में गैस की कमी के कारण शहरों में लंबी कतारें देखी गई हैं और कई रेस्तरां बंद होने की कगार पर पहुँच गए थे।

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ईरान का रुख और वैश्विक प्रतिक्रिया

पिछले कुछ दिनों में ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई द्वारा इस बात के संकेत दिए गए थे कि वे होर्मुज़ स्ट्रेट को एक 'हथियार' के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की थी।

ईरानी नौसेना (IRGC) के कमांडर अलीरेज़ा तंगसीरी ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी इच्छाशक्ति के कारण उन टैंकरों को जाने दिया गया जो सीमाओं से हजारों किलोमीटर दूर थे।

हालांकि कमांडर अलीरेज़ा तंगसीरी ने सीधे तौर पर भारत का नाम नहीं लिया, लेकिन जयशंकर के बयान ने स्पष्ट कर दिया कि पर्दे के पीछे भारतीय कूटनीति काम कर रही थी।

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कूटनीति का नया 'भारतीय मॉडल'

जयशंकर ने साफ कहा कि लड़ाई के माहौल में बातचीत से ही रास्ता निकल सकता है। उनका कहना है कि:

  • भारत इस मामले में अपने अनुभव फ्रांस और इटली जैसे देशों के साथ बाँटने के लिए तैयार है।
  • यूरोपीय देश भी अब भारत की तरह बातचीत के जरिए अपनी गैस और तेल की सप्लाई शुरू करवाना चाहते हैं।
  • भारत का मानना है कि यह संघर्ष दुखद है और वह इस इलाके में शांति चाहता है।

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निष्कर्ष

फिलहाल, होर्मुज़ स्ट्रेट का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है, लेकिन भारत ने यह साबित कर दिया है कि गहरे द्विपक्षीय संबंधों और सीधे संवाद के जरिए बिना किसी सैन्य टकराव के भी बड़े समाधान निकाले जा सकते हैं। भारत के लिए यह न केवल एक रणनीतिक जीत है, बल्कि करोड़ों नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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