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स्पेशल सेल की बड़ी कामयाबी: दिल्ली-एनसीआर में आतंकी साजिश बेनकाब

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स्पेशल सेल की बड़ी कामयाबी: दिल्ली-एनसीआर में आतंकी साजिश बेनकाब

ISIS-ISI module arrest Delhi: दिल्ली-एनसीआर को दहलाने की बड़ी सामने आई है जहाँ आतंकी साजिश को सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दिया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और झारखंड एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में ISIS-ISI मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ है। इस ऑपरेशन में दिल्ली और रांची से दो आतंकियों जिनका नाम आफताब और अशरफ उर्फ दानिश है, उनको गिरफ्तार कर लिया गया है. जबकि कुल आठ से अधिक संदिग्धों पर शिकंजा कसा गया है। इनके कब्ज़े से हथियार, विस्फोटक बनाने की सामग्री और कट्टरपंथी दस्तावेज़ बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आतंकी दिल्ली-एनसीआर में बड़े धमाकों और गजवा-ए-हिंद जैसी विचारधारा फैलाने की तैयारी कर रहे थे।

आतंकियों के कब्ज़े से हथियार व बम बनाने की सामग्री, केमिकल, डिजिटल उपकरण, दस्तावेज़ आदि बरामद हुए हैं। मॉड्यूल का मकसद, गजवा-ए-हिंद जैसे कट्टरपंथी प्रस्तावों के ज़रिए युवाओं को जिहादी विचारधारा से जोड़ना और दिल्ली-एनसीआर सहित विभिन्न हिस्सों में बड़े आतंकी हमले की साजिश रचने की योजना थी। इस कार्रवाई में अब तक 8 से ज़्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है और 5-12 ठिकानों पर छापेमारी जारी है। 

पूरी घटना का क्रम

ISIS-ISI module arrest Delhi: सूचना एवं शुरुआती जांच की बात करे तो केंद्रीय एजेंसियों को सूचना मिली कि दिल्ली-एनसीआर में एक आतंकी मॉड्यूल सक्रिय है जो बड़े हमलों की साजिश रच रहा है। पहली गिरफ्तारी मुंबई निवासी आतंकी आफताब को दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाके से हिरासत में लिया गया और दूसरी गिरफ्तारी अशरफ उर्फ़ दानिश को रांची, लोअर बाज़ार इस्लाम नगर के तबारक लॉज से गिरफ्तार किया गया। 

छापेमारी और बरामदगी में दोनों इलाकों में हथियार, बम बनाने की सामग्री जैसे केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि बरामद हुए। जांच का दायरा बढ़ा तब अन्य संदिग्धों से पूछताछ, मॉड्यूल के नेटवर्क की जांच, और यह पता लगाने की कोशिश कि साजिश की योजना का निशाना कौन-कौन से स्थान थे।

प्रभाव एवं आगे की कार्रवाई की संभावना

सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और बेहतर इंटेलिजेंस ने संभावित बड़े आतंकी हमले को रोका है। दिल्ली-एनसीआर सहित आसपास के शहरों में सुरक्षा व्यवस्था को और भी कड़ा किया जा सकता है। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से फैल रही कट्टरपंथी विचारधाराओं की जाँच भी तेज़ हो जाएगी। गिरफ्तार आतंकियों और मॉड्यूल से जुड़े अन्य सदस्यों के बयान और दस्तावेज़ों की जांच से यह स्पष्ट होगा कि उनकी साजिश कितनी विस्तृत थी।

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