ट्रंप का 'पीस कार्ड': कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट!

Impact of Trump’s Peace Signals on Global Oil Prices in Hindi : क्या आपने कभी ऐसा सोचा था कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया की राजनीति का सबसे मुख्य केंद्र मिडल ईस्ट बन जाएगा, जहाँ तीन बड़ी बातें एक साथ हो रही हैं। पहली, ईरान में नए नेता के आने की चर्चा हो रही है जिससे वहां की सरकार बदल सकती है।
दूसरी, इजरायल अपने दुश्मनों को खत्म करने के लिए बहुत आक्रामक युद्ध लड़ रहा है। और तीसरी, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी हो गई है, जिनकी सख्त नीतियां पूरी दुनिया के समीकरण बदल सकती हैं।
ख़बरों के अनुसार, इन तीनों वजहों से आज दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ से या तो एक बड़ा युद्ध छिड़ सकता है या फिर शांति के लिए कोई ऐतिहासिक समझौता हो सकता है।
Impact of Trump’s Peace Signals on Global Oil Prices in Hindi
ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा
ईरान-इजराइल युद्ध को लेकर बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठा रहा है कि क्या तेहरान में एक नए युग की शुरुआत होने वाली है? बता दें कि ईरान से आ रही हालिया रिपोर्टों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे, मोजतबा खामेनेई का नाम उत्तराधिकारी के रूप में प्रमुखता से उभर रहा है।
- सत्ता का संक्रमण: यदि मोजतबा को ईरान के नए सुप्रीम लीडर के तौर पर चुना जाता है, तो यह ईरान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव हो सकता है।
- चुनौतियां: क्या ईरान की जनता और वहां का रसूखदार 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' (IRGC) इस विरासत को सहजता से स्वीकार करेगा? यह सवाल भविष्य के गर्भ में है।
इजरायल और हमास-हिजबुल्लाह संघर्ष
इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के नेतृत्व में इजरायल ने इस बात को साफ कर दिया है कि वह अपने देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। बड़ी ख़बर यह है कि गाजा में हमास और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई केवल सैन्य अभियान नहीं, बल्कि ईरान के 'प्रॉक्सिमिटी नेटवर्क' को ध्वस्त करने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है।
पिछले कुछ समय से ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध को लेकर पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि युद्ध के इतने दिनों बाद, इजराइल ईरान को लेकर क्या सोच रहा है? इजरायल का लक्ष्य ईरान को सीधे तौर पर कमजोर करना है ताकि वह अपने समर्थित समूहों के जरिए इजरायल को परेशान न कर सके।
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डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और 'मैक्सिमम प्रेशर'
क्या आप जानते हैं कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी ने सम्पूर्ण अमेरिका की नीतियों को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है, जिसे आप निम्नलिखित बातों के माध्यम से समझ सकते हैं जैसे कि :-
- ईरान पर सख्त प्रतिबंध: ऐसा कहा जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन फिर से 'मैक्सिमम प्रेशर' की नीति अपना सकता है, जिसका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाकर उसे परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय दखल से पीछे हटने पर मजबूर करना है।
- इजरायल को खुला समर्थन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इजराइल को भरपूर सर्मथन दिया जा रहा है।
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क्या युद्ध खत्म सकता है?
दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहा यह युद्ध और अधिक विनाशकारी रूप ले लेगा? हालांकि स्थिति तनावपूर्ण है, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि ट्रंप एक "डील मेकर" की छवि रखते हैं। वे युद्ध के बजाय आर्थिक दबाव और बातचीत के जरिए ईरान को मेज पर लाने की कोशिश कर सकते हैं।
सच तो यह है कि एक तरफ युद्ध की आग पहले से ही भड़की हुई है, वहीं दूसरी ओर ईरान अपनी डूबती अर्थव्यवस्था और देश के अंदर हो रहे विद्रोह की वजह से इस लड़ाई को 'सीधे टकराव' में बदलने से कतरा रहा है। वह जानता है कि एक और बड़ा मोर्चा खुलना उसके लिए आत्मघाती हो सकता है।
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निष्कर्ष
क्या यह वाकई अंत की शुरुआत है? मिडल ईस्ट के खेल में अब सभी खिलाड़ी आमने-सामने हैं। एक तरफ ईरान अपनी साख और वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है, तो दूसरी तरफ इजरायल और अमेरिका मिलकर इस इलाके के नियम बदलना चाहते हैं। आने वाले कुछ महीने बहुत कीमती हैं, क्योंकि यही तय करेंगे कि यहाँ शांति होगी या फिर यह युद्ध एक विकराल रूप ले लेगा?
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