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खामेनेई की मौत का 'मास्टरमाइंड': इजरायल के पास 3 महीने से था पूरा ब्लूप्रिंट!

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खामेनेई की मौत का 'मास्टरमाइंड': इजरायल के पास 3 महीने से था पूरा ब्लूप्रिंट!

Khamenei Assassination Planning : पिछले कुछ दिनों से चल रहे ईरान-इजराइल युद्ध को देखते हुए यह कहना सही है कि पश्चिम एशिया के इतिहास में फरवरी और मार्च 2026 के महीने सबसे बड़े बदलाव के गवाह बन रहे हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अब इजरायल ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है।

Khamenei Assassination Planning

हाल ही में, इजरायल के रक्षा मंत्री काट्ज़ ने यह कहा है कि खामेनेई को मारने का फैसला कोई जल्दबाजी में लिया गया एक्शन नहीं था, बल्कि इसकी इस घटना को अंजाम देने की रणनीति 3 महीने पहले ही तैयार कर ली गई थी।

1. नवंबर की वो गुप्त बैठक

इजराइल के रक्षा मंत्री काट्ज़ के अनुसार,  इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा नवंबर 2025 में एक बहुत ही छोटे और गुप्त फोरम की बैठक बुलाई गई थी। ऐसा बताया जा रहा है कि इजराइल के प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई इस गुप्त बैठक में 'टारगेट खामेनेई' का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

कई रणनीतिकारों  का यह भी मानना है कि जब तक ईरान का शीर्ष नेतृत्व कायम है, तब तक इजरायल के अस्तित्व पर खतरा बना रहेगा।

इजराइल की इस गुप्त बैठक में यह फैसला लिया गया था कि इस ऑपरेशन को जून 2026 के आसपास अंजाम दिया जाना था। ख़बरों के अनुसार, इजरायल इस ऑपरेशन को अकेले अंजाम देने की तैयारी में था और उसने शुरू में वाशिंगटन के साथ भी इस ऑपरेशन से जुडी किसी भी प्रकार की कोई जानकारी साझा नहीं की थी।

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2. समय से पहले क्यों हुआ हमला?

सोचने वाली बात यह है कि अगर योजना जून की थी, तो 28 फरवरी इजराइल द्वारा ईरान पर हमला क्यों किया? इसके पीछे दो बड़े कारण रहे, जिसे आप निम्नलिखित बातों से समझ सकते हैं:

  • ईरान के भीतर जनआक्रोश: क्या आपको पता है कि दिसंबर और जनवरी में ईरान की सरकार के प्रति वहां के आम नागरिकों द्वारा किए गए प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया था। इस प्रदर्शन के दौरान ईरान के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे।
  • इंटेलिजेंस इनपुट: इजरायली और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के द्वारा मिले इनपुट के अनुसार, ईरान अपनी घरेलू अस्थिरता से ध्यान भटकाने के लिए इजरायल या अमेरिकी ठिकानों पर 'प्री-एम्प्टिव' यानी कि पहले हमला कर सकता है।

ईरान की इन हरकतों को देखते हुए, इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गुप्त बैठक हुए थी, जिसमें यह फैसला लिया गया था कि ऑपरेशन को करीब 4 महीने पहले ही अंजाम दिया जाएगा।

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3. 30 प्रिसिजन बम और सटीक निशाना

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई 28 फरवरी, 2026 की सुबह जब अपने तेहरान स्थित आवास पर एक उच्चस्तरीय बैठक कर रहे थे, तभी इजरायली और अमेरिकी वायुसेना की वायु सेना द्वारा संयुक्त हमला कर दिया गया था।

  • सटीकता: रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजराइल की वायु सेना द्वारा तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को वर्षों पहले हैक कर लिया गया था ताकि खामेनेई की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
  • हमला: अमेरिका और इजराइल ने इस बात को पहले ही तय कर लिया था कि हमला इतना सटीक और शक्तिशाली होना चाहिए, ताकि खामेनेई किसी भी प्रकार से न बच पाए। इस घटना को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए इजरायली विमानों ने खामेनेई के परिसर पर लगभग 30 प्रिसिजन बम गिराए।
  • परिणाम: ईरान पर हुए हमले के कुछ घंटों बाद ही यह पुष्टि हो गई कि खामेनेई, उनके परिवार के कुछ सदस्य और कई शीर्ष सैन्य कमांडर मारे गए हैं।

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4. इजरायल का अंतिम लक्ष्य

ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद, इजराइल के रक्षा मंत्री काट्ज़ ने स्पष्ट किया कि खामेनेई की मौत केवल एक शुरुआत है। 

इजरायल का असली मकसद, ईरान के परमाणु कार्यक्रम के पूरी से तरह से नष्ट करना है। इतना ही नहीं, इजराइल चाहता है कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को पूरी तरह से तबाह कर दिया जाए।

क्या यह युद्ध का अंत है?

बता दें कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद ईरान में फिलहाल 40 दिनों का शोक घोषित कर दिया गया है और वहां की सड़कों पर जश्न और मातम का मिला-जुला माहौल है। 

हालांकि, ईरान ने पलटवार करते हुए तेल अवीव पर मिसाइलें दागी हैं, जिससे युद्ध के और फैलने का खतरा बढ़ गया है। इजरायल के इस खुलासे ने साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में केवल हथियार नहीं, बल्कि डेटा और प्लानिंग सबसे बड़े हथियार हैं।

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