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RSS के 100 साल पूरे, मुंबई में मोहन भागवत ने रखे अपने विचार

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RSS के 100 साल पूरे, मुंबई में मोहन भागवत ने रखे अपने विचार

RSS Celebrating 100 Years: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने के अवसर पर मुंबई में एक बड़ा और विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में हुआ, जहाँ देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोग मौजूद थे। इस कार्यक्रम में आरएसएस संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन की यात्रा, उसके उद्देश्य और समाज में उसकी भूमिका को लेकर विस्तार से बात की। यह समारोह संघ के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव माना जा रहा है।

कार्यक्रम की शुरुआत संघ के अब तक के 100 सालों के कार्यों की चर्चा से हुई। मंच पर मौजूद वक्ताओं ने बताया कि आरएसएस की शुरुआत समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से हुई थी। इस मौके पर मोहन भागवत ने कहा कि संघ का लक्ष्य केवल संगठन को बड़ा बनाना नहीं है, बल्कि समाज को जोड़ना, लोगों में आपसी समझ बढ़ाना और देश को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि संघ हमेशा चुपचाप काम करता है और दिखावे पर विश्वास नहीं करता।

मोहन भागवत का संदेश: संघ किसी एक वर्ग का नहीं

अपने भाषण में मोहन भागवत ने साफ कहा कि आरएसएस किसी एक धर्म, भाषा या वर्ग का संगठन नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ समाज के हर हिस्से के लिए काम करता है। चाहे वह गरीब हो, मध्यम वर्ग हो या शिक्षित युवा, संघ सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की तरक्की तभी संभव है जब समाज में आपसी विश्वास और सहयोग हो।

भागवत ने बताया कि संघ का काम प्रचार करना नहीं, बल्कि सेवा करना है। उन्होंने कहा कि जब भी देश पर संकट आया है, संघ के स्वयंसेवकों ने आगे बढ़कर मदद की है। प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कार्य, सामाजिक समस्याओं में सहयोग और शिक्षा से जुड़े प्रयास इसका उदाहरण हैं।

राजनीति और संघ की भूमिका पर बात

कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने राजनीति और संघ के रिश्ते पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संघ किसी राजनीतिक पार्टी के लिए काम नहीं करता, लेकिन यह सच है कि संघ की विचारधारा से जुड़े लोग अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों की सफलता या असफलता केवल नेताओं पर निर्भर नहीं होती, बल्कि समाज में काम कर रहे संगठनों और विचारों का भी उसमें योगदान होता है।

भागवत ने यह बात साफ शब्दों में कही कि संघ का उद्देश्य सत्ता पाना नहीं, बल्कि समाज में अच्छे संस्कार और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है। उन्होंने कहा कि यदि समाज मजबूत होगा, तो देश अपने आप मजबूत होगा।

सेवा, अनुशासन और संस्कार पर जोर

मोहन भागवन ने अपने भाषण में सेवा और अनुशासन को बहुत महत्त्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संघ का हर स्वयंसेवक बिना किसी स्वार्थ के समाज के लिए काम करता है। संघ में काम करने वाले लोग किसी पद या नाम के लिए नहीं बल्कि अपने कर्तव्य के लिए काम करते हैं।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने जीवन में अनुशासन अपनाएं और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदार समझें। भागवत ने कहा कि आज के समय में युवाओं की भूमिका बहुत बड़ी है और अगर वे सही दिशा में काम करें, तो देश का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।

भाषा, संस्कृति और एकता का संदेश

भाषा के मुद्दे पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संघ किसी एक भाषा को थोपने में विश्वास नहीं करता। उन्होंने कहा कि भारत में कई भाषाएँ हैं और सभी का सम्मान होना चाहिए। संघ का उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, न कि भाषा या संस्कृति के आधार पर बाँटना।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता है। अलग-अलग परंपराएँ, रीति-रिवाज और विचारधाराएँ मिलकर भारत को खास बनाती हैं। संघ इसी विविधता को बनाए रखते हुए एकता को मजबूत करना चाहता है।

कार्यक्रम में पहुँची मशहूर हस्तियाँ

इस शताब्दी समारोह में समाज के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी कई जानी-मानी हस्तियाँ भी मौजूद रहीं। कला, संस्कृति और फिल्म जगत से जुड़े लोगों की मौजूदगी ने यह दिखाया कि संघ अब समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद बढ़ा रहा है। कार्यक्रम का माहौल शांत, अनुशासित और विचारपूर्ण रहा।

संघ के 100 वर्ष और आगे की राह

अपने संबोधन के अंत में मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस के 100 वर्ष केवल अतीत को याद करने का समय नहीं हैं, बल्कि भविष्य की जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में संघ समाज के साथ मिलकर शिक्षा, सेवा और सामाजिक क्षेत्र में और अधिक काम करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि संघ का रास्ता आसान नहीं है, लेकिन सेवा और समर्पण के बल पर यह यात्रा आगे भी जारी रहेगी।

आरएसएस के उद्देश्य को समझने का अवसर

मुंबई में आयोजित आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने का यह समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि संगठन की सोच, दिशा और उद्देश्य को समझने का अवसर था। मोहन भागवत के बयान से यह साफ हुआ कि संघ खुद को एक सामाजिक संगठन के रूप में देखता है, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज को जोड़ना, सेवा करना और देश को मजबूत बनाना है। यह समारोह संघ की अब तक की यात्रा और आगे की राह दोनों को दर्शाता है।

FAQs

1. आरएसएस के 100 वर्ष का समारोह कहाँ और क्यों आयोजित किया गया?

उत्तर- आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर यह समारोह मुंबई में आयोजित किया गया जिसका उद्देश्य संघ की 100 साल की यात्रा को लोगों के सामने रखना था।

2. मोहन भागवत ने अपने भाषण में मुख्य रूप से क्या कहा?

उत्तर- मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य समाज को जोड़ना, सेवा करना और देश को मजबूत बनाना है।

3. इस कार्यक्रम का समाज के लिए क्या संदेश था?

उत्तर- इस कार्यक्रम का संदेश था कि समाज में एकता, अनुशासन और आपसी सहयोग से ही देश की प्रगति संभव है।

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