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सऊदी, क़तर और ओमान ने ट्रंप को ईरान पर सैन्य हमले से कैसे रोका?

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सऊदी, क़तर और ओमान ने ट्रंप को ईरान पर सैन्य हमले से कैसे रोका?

पिछले कुछ दिनों से निरंतर अमेरिका और ईरान के बीच अधिक तनावपूर्ण स्थिति देखनें को मिल रही है। कई बार अमेरिका द्वारा इस बात के भी संकेत दिए गए है कि वह ईरान पर किसी भी समय सैन्य कार्यवाई कर सकता है। कुछ देशों की इस विवाद में दखल के बाद इस कहानी ने एक अलग मोड़ ले लिया है।

हाल ही में, सऊदी अरब, क़तर और ओमान जैसी खाड़ी की प्रमुख शक्तियों ने मिलकर एक सक्रिय कूटनीति अपनाई जा रही है, ताकि डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान पर होने वाले संभावित हमले को रोका का सके।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता विवाद

काफी समय से ईरान में वहां के आम नागरिकों द्वारा बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन किया जा रहा है। ख़बरों के अनुसार, इस प्रदर्शन के दौरान कई आम नागरिकों की जान भी चली गई है।

ईरान में चल रहे इस प्रदर्शन को देखते हुए अमेरिका सरकार द्वारा दमन की निंदा की गई थी। साथ ही डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि अगर इस प्रकार की हिंसा जारी रहती है तो इसे रोकने के लिए सैन्य कार्यवाई की जा सकती है।

खाड़ी देशों का अमेरिका-ईरान विवाद में कूटनीतिक हस्तक्षेप

ईरान पर होने वाली संभावित सैन्य कार्यवाई को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब, क़तर और ओमान ने अमेरिका से कहा है कि ईरान पर सैन्य हमला मध्य पूर्व में व्यापक अस्थिरता उत्पन्न कर सकता है। इसके अलावा, भी इन सभी देशों के कुछ अधिकारियों द्वारा निम्नलिखित बातें कही गई है जैसे कि –

  • यदि अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई की जाती है तो इससे पूरे क्षेत्र में अराजकता का खतरा बढ़ सकता है।
  • अमेरिका की सैन्य कार्यवाई के कारण सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ेगा। साथ ही इसका असर वैश्विक तेल बाजार देखनें को मिल सकता है।

सैन्य कार्रवाई रोकने के पीछे प्रमुख चिंताएं

1. क्षेत्रीय अस्थिरता का डर : 

ईरान पर होने वाली संभावित सैन्य कार्यवाई को लेकर खाड़ी राज्यों की चिंता थी कि ईरान पर हमला पूरे मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ा सकता है। उन्होंने इस बात को भी कहा है कि इससे पहले से नाजुक सुरक्षा संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है।

2. तेल बाजार पर प्रभाव

क्या आपको पता है कि मध्य पूर्व दुनिया के तेल व प्राकृतिक गैस आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। अगर अमेरिका-ईरान विवाद अधिक बढ़ता है तो तेल उत्पादन और परिवहन प्रभावित हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।

3. अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा

इन सभी देशों ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों और हितों पर प्रत्यक्ष हमले के खतरे की भी चेतावनी दी है। अमेरिका द्वारा संभावित किसी व्ही प्रकार की सैन्य कार्यवाई के चलते अमेरिकी कर्मियों और संपत्तियों को जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रंप ने क्या निर्णय लिया?

ईरान पर होने वाली संभावित सैन्य कार्यवाई को रोकने के लिए दुनिया के खाड़ी देशों द्वारा कई कुटनीतिक प्रयास किए गए हैं, जिसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अचानक ईरान पर तत्काल हमला करने के बजाय सयंम रखने का निर्णय किया है।

यह निर्णय लेते हुए ट्रम्प का कहना है कि उन्हें ''कुछ बहुत महत्वपूर्ण स्रोतों से आश्वासन मिला है” कि ईरान में प्रदर्शन कुछ हद तक रुक गया है।

क्या सच में पूरी स्थिति शांत हो गई है?

हाल में ट्रम्प द्वारा ईरान सैन्य कार्यवाई को लेकर फैसले टाल दिया गया है, डोनाल्ड ट्रम्प ने वाइट हाउस से साफ तौर पर कहा है कि सभी प्रकार के विकल्प अब भी तैयार है। अमेरिका ने तनाव कम करने के बावजूद ईरान पर नए प्रतिबंधों और चेतावनियों को जारी रखा है।

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क्यों खाड़ी देशों ने ऐसा कदम उठाया?

दुनिया के खाड़ी देशों द्वारा इस पहल को न केवल क्षेत्रीय स्थिरता की चिंता को ध्यान में रखते हुए, बल्कि वैश्विक आर्थिक हितों और स्थानीय सुरक्षा संरचना को भी ध्यान में रखकर की गई है। साथ ही इन सभी देशों का यह भी कहना कि युद्ध फैलने की स्थिति में उनके ही देशों में अधिक संघर्ष देखने को मिल सकता है

FAQs-

Q. क्या कतर और अन्य खाड़ी देश ईरान के साथ हैं?

A. वर्तमान अमेरिका-ईरान विवाद को देखते हुए कतर और अन्य बाकी खाड़ी देश ईरान के साथ हैं, इन देशों द्वारा ईरान पर होने वाली संभावित सैन्य कार्यवाई को रोकने के लिए कूटनीति बना ली है

Q. ईरान पर सैन्य कार्यवाई रोकने हेतु ट्रम्प का क्या निर्णय है?

A. अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा फिलहाल के लिए ईरान पर होने वाली संभावित सैन्य कार्यवाई को टालने को कहा है

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