सुप्रीम कोर्ट ने कहा यूजीसी 2012 नियम फिर लागू हो
UGC Rules 2012 Back News: भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में बड़ा फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किए गए नए समानता नियम 2026 (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026) पर रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब तक इस पर अगली सुनवाई नहीं होती तब तक 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे। इस फैसले से देशभर के विश्वविद्यालय और कॉलेजों में नियमों का दायरा फिर वही हो गया है जो नियम लगभग एक दशक पहले हुआ करते थे।
2012 के UGC नियम क्या थे और क्यों बनाए गए?
साल 2012 में यूजीसी ने Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2012 नियम जारी किए थे। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य था उच्च शिक्षा संस्थानों में किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकना और जाति आधारित भेदभाव पर ध्यान देना।
इन नियमों के अंतर्गत Equal Opportunity Cells (EOC) बनाना था। इसके अलावा भेदभाव की शिकायतों के लिए एक ढांचा निर्धारित किया गया था। छात्र, छात्राएं और कर्मचारियों के बीच समान अवसर सुनिश्चित करना इस नियम का प्रमुख लक्ष्य था।
हालांकि 2012 के नियम सलाह आधारित थे और इनका प्रभाव हर जगह समान रूप से नहीं दिखा, फिर भी ये पहले वैधानिक ढांचे के रूप में काम करते थे।
2026 के नए नियम क्यों आए और क्या बदलाव थे?
जनवरी 2026 में यूजीसी ने नई नियमावली जारी की जिसे Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026 कहा गया। इन नियमों में कुछ महत्त्वपूर्ण बदलाव शामिल थे, जैसे- पुराने 2012 के नियमों की जगह ये नए और अधिक विस्तृत नियम लागू होते। इस बार नियमों को अनिवार्य बनाया गया कि हर महाविद्यालय/विश्वविद्यालय इनका पालन करें।
इसमें न सिर्फ अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) बल्कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), महिला, दिव्यांग और अन्य समूह भी शामिल थे। हर संस्थान में Equal Opportunity Centre (EOC) और Equity Committee बनाना अनिवार्य किया गया। अलग-अलग वर्गों के बीच समानता सुनिश्चित करने के लिए 24×7 हेल्पलाइन और स्पष्ट शिकायत समाधान प्रक्रिया निर्धारित की गई थी।
अगर कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता, तो यूजीसी उसकी फंडिंग रोक सकता है या मान्यता रद्द कर सकता है। ये बदलाव इसलिए लाए गए थे क्योंकि यूजीसी के अपने आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में जाति-आधारित शिकायतों में बड़ी वृद्धि देखी गई थी और पुराने नियम पर्याप्त रूप से काम नहीं कर रहे थे।
UGC 2026 नियमों पर विवाद क्यों?
नई नियमावली लागू करते ही इसके कुछ प्रावधान विवाद का कारण बन गए। मुख्य रूप से विवाद इसी बात को लेकर है कि नियम में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा स्पष्ट नहीं है, जिससे इस नियम का दुरुपयोग किया जा सकता है।
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कुछ समूहों का मानना है कि सामान्य श्रेणी को नियम से बाहर रखा गया है, जबकि केवल कुछ विशिष्ट वर्गों को शामिल किया गया है। विरोधियों ने कहा कि इससे समानता के संवैधानिक सिद्धांत (Article 14 और Article 15) उलझ सकते हैं और नियम समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं।
छात्रों और लोगों के कुछ समूहों ने सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिए। इन याचिकाओं के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नए नियम की भाषा अस्पष्ट और दुरुपयोग की संभावना वाली लगती है, इसलिए इसे सावधानीपूर्वक फिर से देखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने निर्णय देते हुए कहा कि वर्तमान में 2012 के नियम लागू रहेंगे जब तक कि नए नियमों पर अगली सुनवाई नहीं हो जाती। अदालत ने कहा है कि नए नियमों में भेदभाव की परिभाषा, शिकायत प्रक्रिया, समानता का दायरा जैसी बातें विशेषज्ञों द्वारा स्पष्ट रूप से देखी जानी चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को तय की है, जिसमें सरकार, यूजीसी और याचिकाकर्ता सभी पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। लेकिन तब तक 2012 के नियम लागू रहेंगे, ताकि भेदभाव के खिलाफ शिकायतों का समाधान निरंतर मिल सके।
विशेषज्ञों और नीतिनिर्माताओं द्वारा 2026 नियमों की समीक्षा के बाद ही अंतिम निर्णय किया जाएगा कि इन्हें लागू किया जाए या संशोधित रूप में लाया जाए।
FAQs
1. UGC के 2012 नियम क्या हैं?
उत्तर- UGC के 2012 नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए थे। इनका उद्देश्य सभी छात्रों, खासकर SC/ST वर्ग के छात्रों को समान अवसर देना था।
2. UGC 2026 के नए नियमों पर रोक क्यों लगी?
उत्तर- सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि 2026 के नियमों में कुछ परिभाषाएँ स्पष्ट नहीं थीं और उनके दुरुपयोग की आशंका थी, इसलिए अदालत ने उन पर अस्थायी रोक लगा दी।
3. फिलहाल विश्वविद्यालयों में UGC के कौन से नियम लागू हैं?
उत्तर- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, अगली सुनवाई तक UGC के पुराने 2012 नियम ही सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लागू रहेंगे।
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