खराब जीवनशैली से बढ़ता है डायबिटीज और स्ट्रेस डिसऑर्डर होने का खतरा

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किसी भी व्यक्ति के अस्वास्थय रहना का सबसे बड़ा कारण होता है उसका खराब लाइफस्टाइल। इतना ही नहीं उस व्यक्ति के ख़राब लाइफस्टाइल के चलते उसे मोटापा, टाइप – 2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, ह्रदय रोगों और कैंसर जैसी खतरनाक बिमारियों का भी सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि वर्तमान समय में अधिकतर लोग ख़राब आहार, धूम्रपान, शराब के सेवन से घिरे होते है। परन्तु वह व्यक्ति इस बात से अनजान रहते है की उनकी इस बुरी आदत का परिणाम उनके लिए बहुत खतरनाक हो सकता है। जिससे बच पाना बाद में उनके लिए बेहद मुश्किल हो सकता है।

आज के समय अधिकतर लोग डायबिटीज और स्ट्रेस डिसऑर्डर बिमारियों से जूझ रहे होते है। यदि हम अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह महासंघ को ध्यान में रखते हुए बात करें तो वर्ष 2017 में देश के अंदर लगभग 72,946,400 मधुमेह रोगियों के बारे में पता चला है। यदि इस आँकड़े को ध्यान में रखते हुए सोचे तो वर्ष 2025 तक  मधुमेह से पीड़ित दुनिया के 30 करोड़ वयस्कों में से तीन-चौथाई गैर-औद्योगिक देशों शामिल हो सकते है।

वही अगर क्लिनिकल न्यूट्रीनिस्ट, डाइटिशियन और हील योर बॉडी के संस्थापक रजत त्रेहन के नजरिए से बात करें तो उन्होंने हार्वर्ड टीएच चेन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं के द्वारा किए गए अध्ययन में यह पाया गया है की भारत के अंदर मधुमेह और उच्च रक्तचाप की दर सभी भौगोलिक क्षेत्रों और सामाजिक-जनसांख्यिकीय समूहों को देखा जाए तो मध्यम आयु वर्ग के बुजुर्गो की संख्या काफी अधिक है।

महिलाओं के मुकाबले पुरुष को अधिक होता है इस बीमारी का खतरा

इसके अलावा, रजत ने कहा है की दिनप्रतिदिन शहरीकरण की ओर बढ़ रहे भारतीय समाज में दो प्रकार की बिमारियों की होने की अधिक आसार है। मधुमेह की बीमारी को पुरुष व महिला दोनों में पाया जा सकता है। क्योंकि मधुमेह की बीमारी का शिकार महिलाओं के मुकाबले पुरुष अधिक है।

वही अगर हम प्रदूषण की बात करें तो विश्व में सबसे अधिक प्रदूषित शहरों की बात करें तो भारत के उसमें सात देश शामिल है। वैश्विक स्वास्थ्य के एक आँकड़े के अनुसार, पीएम 2.5 जिसे अधिकांश प्रमुख भारतीय शहरों में एक प्रमुख प्रदूषक के रूप में कहा गया है। ख़राब प्रदूषण के चलते हृदय रोग, गुर्दे की बीमारी और अन्य गैर-संचारी रोगों के होने अधिक आसार होते है।

कैसे बचा जाए

यदि आप इस रोग से बचना चाहते है तो आपको ध्यान, आयुर्वेद और प्राकृतिक दवाइयों का सेवन करना चाहिए। क्योंकि आज के समय में इस बीमारी के लिए एलोपैथिक उपचार के कई विकल्प मौजूद है। इसके अलावा, पौधो पर आधारित उत्पाद और आहार जैसे प्राकृतिक उपचायर लोगों के लिए इस बीमारी से लड़ने में अधिक लाभदायक साबित होते है।

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