नागरिकता कानून पर सवाल क्यों (Why question on citizenship law)
नागरिकता संशोधन बिल मोदी कैबिनेट ने पास कर दिया और आज संसद यानि 9 दिसंबर 2019 को यह पेश किया जायेगा। देश के गृहमंत्री अमित शाह आज इसे पेश करेगे।
❍ क्या है यह बिल |
इस बिल के मुताबिक जो शरणार्थी अफ़ग़ानिस्तान ,बांग्लादेश और पाकिस्तान से कोई भी हिन्दू ,जैन, सिख , ईसाई और पारसी उन लोगो को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान हैं। जो यहाँ तो गैर कानूनी तरीके से या जिनके रहने की अवधि पूरी हो गयी और फिर भी हिंदुस्तान मे रह रहे हैं वह सीधे भारत की नागरिकता पा सके|
❍ सरकार का पक्ष |
सरकार का माना हैं की पाकिस्तान ,अफ़ग़ानिस्तान दोनों इस्लामिक देश हैं और बांग्लादेश मे धर्मनिरपेक्षता सविधान के परस्तावना में शामिल हैं। लेकिन इस्लाम ही राष्टीय धर्म हैं।
वह पर अल्पसंख्यों के साथ मजहबी उत्पीड़न होता है। जिसकी वजह से उन्हे भारत मे शरण लेनी पड़ती हैं। इसलिए इन छह अल्पसंख्यों को अधिकार देने के लिए ये फैसला सर्व धर्म समभाव के अनुसार हैं|
इन लोगो को इन देशों मे धार्मिक पड़ताड़ना झेलनी पड़ती हैं जिसे वह भाग कर भारत मे आ जाते हैं। इसलिए यह कानून उन लोगो को एक राहत देगा। यह फैसला उन लोगो पर लागु होगा जो 31 दिसंबर 2014 से पहले यहाँ रह रहे हैं।
इस बिल के अनुसार पहले भारत मे 11 साल लगातार रहने पर भारत की नागरिकता मिल जाती थी पर अब इसे घटाकर कर 6 साल कर दिया गया हैं
❍ बिल का विरोध |
मगर विपक्ष इस बिल का ज़बरदस्त विरोध कर रही हैं उसका कहना हैं की राष्टीयता किसी धर्म के आधार पर नहीं होती। देश सब के लिए हैं। यह बिल सविधान की मूलभूल भावना के विरुद्ध हैं।
विपक्ष इसे धार्मिक आधार पर होने वाले भेदभाव के नाम का बिल बता रही हैं और इसका पुरजोर तरीके से विरोध कर रही हैं।
विरोधी लोग बोल रहे हैं की अगर पडोसी देश में अल्पसंख्यों के साथ गलत हो रहा हैं तो। श्रीलंका। तिब्बत और म्यांमार बहार क्यों हैं। वहा पर तो हिन्दू,बौद्ध पर पड़ताड़ना देने का आरोप लगता हैं।
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