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Japan Space Mission Solar Energy : धरती नहीं… अब अंतरिक्ष बनाएगा बिजली!

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Japan Space Mission Solar Energy : धरती नहीं… अब अंतरिक्ष बनाएगा बिजली!

Japan Space Mission Solar Energy :- क्या आपको पता है की आज के समय में हमें दिन प्रतिदिन बिजली और ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ती हुई देखनें को मिल रही है। बढ़ता प्रदूषण भी हमारे लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन गया है। इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिको द्वारा विभिन्न नई तकनीकों पर काम भी शुरू कर दिया है।

Japan Space Mission Solar Energy

इसमें वैज्ञानिकों द्वारा एक बेहतरीन विचार पर काम करने की बात की गई है। जिसमें वे अंतरिक्ष के माध्यम से सौर ऊर्जा को धरती पर भेजेंगे। यदि हम उन देशों की बात करें जो इस काम को सबसे तेज गति से शुरू कर रहा है। उसमें जापान का नाम सबसे आगे देखनें को मिलेगा।

धरती पर सोलर पैनल की सीमाएँ

आप इस बात से तो अच्छे से अवगत होंगे कि सूरज की ऊर्जा हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण होती है। परन्तु क्या आपको है कि पृथ्वी पर मौजूद सोलर पैनल सूरज की रोशनी को बिजली में बदलते हैं, लेकिन उनमें मौसम, रात और अन्य प्राकृतिक बाधाओं के कारण कुछ सीमाएँ होती हैं।

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने सोचा है कि :-

यदि सौर ऊर्जा को अंतरिक्ष में ही इकट्ठा कर लिया जाए जहाँ लगातार धूप रहती है। उसके बाद उसे धरती पर भेजा जाए? वैज्ञानिकों का ये विचार धीरे-धीरे वास्तविकता बनता रहा है।

जापान का OHISAMA नामक एक महत्वाकांक्षी मिशन

हम आपको बताना चाहते है कि जापान की एक स्पेस एजेंसी और वैज्ञानिक “OHISAMA” नामक एक महत्वाकांक्षी मिशन पर निरंतर काम कर रहे हैं, जापान का इस मिशन पर लगातार काम करने का मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा को अंतरिक्ष से धरती पर भेजने की तकनीक का वास्तविक परीक्षण करना है। आपको है कि OHISAMA शब्द का मतलब क्या है? OHISAMA का अर्थ जापानी में “सूरज” होता है।

जापान द्वारा शुरू किए गए इस मिशन के अंतर्गत, एक छोटा उपग्रह तैयार किया जा रहा है। इस तैयार हो रहे छोटे से उपग्रह को पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इसके स्थापित होने के बाद, कई घंटो तक सूरज की रौशनी  को सोलर पैनल के माध्यम से ऊर्जा में बदल दिया जाएगा।

बिना तार के सौर ऊर्जा को पृथ्वी भेजना

बहुत कम लोग इस बात को जानते होंगे कि जापान द्वारा शुरू किए गए इस OHISAMA मिशन की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह वायरलेस यानी की बिना तार के सौर ऊर्जा को पृथ्वी पर भेजा जाएगा।

इस प्रकिया के तीन निम्नलिखित चरण होते है जिनका पालन करके सौर उर्जा को पृथ्वी पर भेजा जा सकता है जैसे कि :-

1. सौर उर्जा को एकत्रित करना :- उपग्रह के सोलर पैनलों की मदद से निरंतर सूरज की उर्जा को एकत्रित किया जाता है।

2. उर्जा को माइक्रोवेव परिवर्तित करना :- सोलर उर्जा को माइक्रोवेव उर्जा में बदल दिया जाता है ताकि उर्जा को लम्बी दूरी तक बिना किसी नुकसान के भेजा जा सके।

3. पृथ्वी पर माइक्रोवेव सिग्नलों को पकड़कर उन्हें बिजली में बदलना :- क्या आपको पता है कि इसकेलिए धरती पर “रेक्टेना” नामक बड़े एंटीना बनाए जाते हैं, जो इन माइक्रोवेव सिग्नलों को पकड़कर उन्हें बिजली में बदल देते हैं।

OHISAMA का छोटा मिशन भी देगा 1 घंटे की बिजली

जापान के इस OHISAMA Mission का पहला परीक्षण छोटा है

इसका आप इस बात से पता लगा सकते है कि इसका उपग्रह लगभग 1 किलोवॉट बिजली उत्पन्न ही कर पाएगा, इसके बावजूद भी आप एक सामान्य घरेलू उपकरण को एक घंटे तक बिना किसी परेशानी के चला सकेंगें।

OHISAMA परीक्षण को वर्ष 2025 शुरू कर दिया गया है

लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि हम अगले ही दशक में अंतरिक्ष-से-ऊर्जा स्टेशन देखेंगे। किसी भी प्रकार के बड़े सिस्टम को सफलतापूर्वक बनाने में थोड़ा अधिक समय भी लग सकता है। अधिक समय लगने के साथ ही साथ आपको इसमें विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता हैं, जैसे:

  • पृथ्वी पर उर्जा को बिना किसी परेशानी के सुरक्षित और सही तरीके से भेजना होता है।
  • बड़े सोलर पैनल को अंतरीक्ष में स्थापित करना होता है।
  • सुरक्षित और सही तरीके से उर्जा को पृथ्वी पर भेजने के साथ ही इस बात भी ध्यान रखना होता है कि कम से कम लागत को खर्च किया जाए।

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