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Donald Trump Venezuela Oil Story : क्या ट्रम्प ने तेल के लिए नई जंग शुरू कर दी?

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Donald Trump Venezuela Oil Story : क्या ट्रम्प ने तेल के लिए नई जंग शुरू कर दी?

क्या दुनिया एक बार फिर वर्ल्ड वॉर की तरफ जा रही हैं? ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी हरकतों से पूरी दुनिया को टेंशन में डाल दिया हैं। हाल ही में, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर अटैक कर दिया गया है। अटैक के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार भी कर लिया गया हैं।

आज हम आपको अपने इस लेख में विस्तारपूर्वक समझाने की कोशिश करेंगे कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला क्यों किया? कौन-से देश अमेरिका के साथ तथा कौन-से देश अमेरिका के खिलाफ हैं?

क्यों बढ़ा America और Venezuela के बीच तनाव?

पिछले कई वर्षों से अमेरिका और वेनेज़ुएला के रिश्तों में तनाव देखनें को मिला है। क्या आपको पता है कि इन दोनों देशों के बीच तनाव की शुरुआत कब शुरू हुई थी? इनके रिश्तों में तनाव तब शुरू हुआ था, जब वेनेज़ुएला द्वारा अपने तेल संसाधनों और अर्थव्यवस्था पर सरकारी नियंत्रण को अधिक बढ़ा दिया गया था।

वेनेज़ुएला के सरकारी संसाधनों के नियंत्रण से अमेरिका नाराज था। जिसके बाद अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने के गंभीर आरोप लगा दिए थे। इतना ही नहीं, अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर कई आर्थिक प्रतिबन्ध भी लगा दिए थे।

अमेरिका की इन हरकतों पर वेनेज़ुएला का कहना था कि अमेरिका जबरन उसके तेल भंडार और राजनीति पर कब्ज़ा करना चाहता है। इन विवादों के बाद पिछले कुछ समय में इन दोनों देशों के बीच हालत और भी अधिक ख़राब हो गए थे। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मुद्दा सिर्फ़ राजनीति नहीं, बल्कि तेल, शक्ति संतुलन और अंतरराष्ट्रीय का भी था।

कब हुई Donald Trump कि इस विवाद में एंट्री?

Donald Trump Venezuela Oil Story को देखें तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एंट्री ने इस पूरी कहानी को एक अलग मोड़ दे दिया था, क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प का कहना था कि वेनेज़ुएला की असली ताकत उसका तेल भंडार है। यदि उसमें स्थिरता लानी है तो उसके तेल विभाग में अमेरिका की भूमिका को अहम भूमिका निभानी होगी।

इसके अलावा, डोनाल्ड ट्रम्प उर्जा के क्षेत्र में अमेरिका को अधिक मजबूत बनाना चाहते हैं। साथ ही साथ Donald Trump चीन और रूस जैसे ताकतवर देशों को Venezuela से दूर रखना चाहते हैं। डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि वेनेजुएला में अपने तेल के उत्पादन को बढ़ाया जाए।

क्या आपको पता है कि ट्रम्प के इस बयान के बाद, दुनियाभर में राजनितिक बहस तेज हो गई हैं। जिसके इस विवाद को  “कंट्रोल” और “इंटरफेरेंस” का नाम दिया गया है। कई राजनितिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा सिर्फ वेनेज़ुएला तक सीमित न रह कर एक वैश्विक राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका हैं।

क्या सच में Donald Trump सिर्फ Venezuela के तेल भंडार पर कब्ज़ा करना चाहते थे?

Donald Trump Venezuela Oil Story में असली मुद्दा सिर्फ तेल है या कुछ और? इस बात से सब अवगत है कि दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वेनेज़ुएला के पास हैं। एक बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद भी राजनीतिक संकट, भ्रष्टाचार और खराब प्रबंधन के कारण अपने उत्पादन की गिरावट नहीं रोक पाया हैं।

यही कारण रहा कि दुनिया के ताकतवर देशों द्वारा वेनेज़ुएला के तेल के उत्पादन के लिए अधिक रूचि दिखाई गई है। इन ताकतवर देशों में अमेरिका के साथ रूस और चीन का नाम भी शामिल हैं। अमेरिका का सोचना है कि वेनेज़ुएला के पास सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि सस्ता ईंधन, ऊर्जा पर नियंत्रण और वैश्विक बाजार पर नियंत्रण हैं।

जबकि वेनेज़ुएला को लगता है कि बाहरी देशों को उसके तेल या अन्य किसी मुद्दे पर कोई भी दखल नहीं देना चाहिए। हाल ही में, अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच तनाव ने तेल की राजनीति को और अधिक जटिल बना दिया है।

इस बढ़ते तनाव पर दुनिया के अन्य देशों की प्रतिक्रिया उनके फ़ायदे को ध्यान में रखते हुए दी जा रही हैं। लेकिन इन सबकी असली कीमत दुनियाभर के आम नागरिकों को चुकानी पड़ती है जिनका इस मामले से कोई लेना देना नहीं हैं।

क्या अमेरिका का वेनेज़ुएला पर कब्ज़ा बनेगा भारत के लिए फ़ायदा?

अमेरिका ने वेनेजुएला पर कंट्रोल के बाद, बड़े - बड़े राजनीतिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा  वेनेजुएला के तेल भंडार पर सम्पूर्ण कब्ज़ा करने के बाद भारत को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता हैं।

ऐसा कहा जा रहा है कि अमेरिका द्वारा 1 अरब डॉलर यानी कि 9000 करोड़ रूपये का बकाया भुगतान हो सकता हैं।  जोकि काफी लम्बे से समय से लंबित था। अमेरिका के कंट्रोल के बाद, भारत द्वारा संचालित विभाग में Crude Oil के उत्पादन में वृद्धि देखनें को मिल सकती हैं।

अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर कब्जे के बाद, President Donald Trump इस बात को स्पष्ट रूप से बोल चुके हैं कि हम वेनेजुएला के ख़राब हो चुके ऑयल  इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए ज़रूरी काम करेंगे। उनका मानना है कि हम पहले से ही तेल के कारोबार में शामिल हैं। इसलिए हमें पता है कि तेल कम्पनियों को तेज गति से मुनाफ़ा कैसे पहुँचाया जाता हैं।

क्या वेनेजुएला है तेल क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा उत्पादक?

एक रिपोर्ट के अनुसार, किसी समय पर Venezuela Crude Oil भारत के लिए सबसे बड़ा आयातक देश था। इतना ही नहीं, देश में प्रतिदिन 4 लाख बैरल से अधिक तेल का आयात होता था। परन्तु वर्ष 2020 से निरंतर परिस्थितियों में बदलाव देखनें को मिले थे। अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध और अनुपालन जोखिमों कम करने के लिए आयात पर बैन लगाया गया था।

कब्जे के बाद क्या रहेगी ट्रम्प की रणनीति?

वेनेज़ुएला पर कब्जे के लिए डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा सबसे मजबूत सैन्य टीम को युद्ध के मैदान में उतारा गया था। जबकि अमेरिकन मंत्री डग बर्गम और ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को अमेरिकी तेल कंपनियों की रुचि का आकलन करनी की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी दी गई थी।

इन दोनों मंत्रियों को इस बड़ी ज़िम्मेदारी को इसलिए सौंपा गया था क्योंकि ये दोनों राष्ट्रपति की ‘नेशनल एनर्जी डोमिनेंस काउंसिल’ के सर्वेसर्वा हैं। इनको खासतौर पर दो जिम्मेदारियाँ दी गई थी जैसे कि :-

1. अमेरिका को उर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना

2. रूस और अन्य मध्य पूर्व के देशों पर निर्भरता को कम करना

क्या तेल के दामों में हो सकती है भारी गिरावट?

इस मुद्दे पर दुनिया के कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अन्तर्राष्ट्रीय सम्पर्क सम्पूर्ण रूप से बेहाल हो जाए, तो वेनेज़ुएला में तेल के उत्पादन को दुबारा सुचारू रूप से शुरू करने के लिए काफी अधिक समय लग सकता हैं। इसके लिए बहुत बड़ी रकम को भी खर्च करना पड़ सकता हैं।

वेनेजुएला की एक सरकारी गैस कंपनी का कहना है कि देश की पाइपलाइनों को करीबन 50 वर्षों से अपडेट नहीं किया गया हैं। यदि इन पाइपलाइनों को उच्चतम स्तर पर अपडेट किया जाए तो इसमें लगभग 58 अरब डॉलर का खर्चा आ सकता हैं।

कौन ट्रम्प की वेनेज़ुएला नीति समर्थन करता है?

Donald Trump Venezuela Oil Story में अभीतक आपको यह तो पता चल गया होगा कि अमेरिका और वेनेज़ुएला में तनाव क्यों बढ़ा? तथा इससे भारत को क्या फ़ायदा हो सकता हैं? अब हम आपको बताएँगे की कौन ट्रम्प की वेनेज़ुएला नीति में उनके साथ खड़ा हैं?

 ट्रम्प के साथ देने वालों लोगों की अपनी-अपनी वजहें हो सकती हैं। डोनाल्ड ट्रम्प की इस नीति को अमेरिकी तेल कंपनी एक अवसर के रूप में देख रही हैं। क्योंकि इससे वेनेज़ुएला के बड़े तेल भंडार तक आसानी से पहुँचा जा सकेगा।

दुनिया के कुछ पश्चिमी देश और लैटिन अमेरिकी सरकारें भी ट्रम्प की इस नीति का समर्थन करती दिख रही हैं, क्योंकि इन देशों को लगता है कि इससे तेल के क्षेत्र में एक आर्थिक संतुलन बनाया जा सकेगा।

कई अमेरिकी सरकारों ने भी डोनाल्ड ट्रम्प की इस नीति का समर्थन किया हैं। डोनाल्ड ट्रम्प की “America First” और “Energy Dominance” की सोच को काफी पसंद किया गया है।

Venezuela Vs Donald Trump पर भारत का क्या रुख हैं?

बीते शनिवार को हुए सैन्य अभियान के तहत समृद्ध वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया था। जिसके बाद, रविवार यानी कि 04 जनवरी को भारत की ओर से वेनेज़ुएला पर हुए हमले पर गहरी चिंता को जताया गया हैं। भारत का कहना है कि वह वेनेजुएला में तेजी बदल रही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला में वर्तमान चल रहे घटनाक्रम चिंता का विषय माना हैं।

अमेरिका की इस करवाई पर चीन का क्या कहना हैं?

हाल ही में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिकी सेना द्वारा हिरासत में ले लिया गया है। चीन द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति लेने तथा सैन्य करवाई कड़ी निंदा की गई है।

इतना ही नहीं, चीन द्वारा कहा गया है कि वह जल्द ही मादुरो दंपति को को रिहा कर दें। चीन का कहना है कि संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ बल का ऐसा प्रयोग अन्तर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना जाएगा।

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