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क्यों लगता है चंद्र ग्रहण और क्या है इसका आध्यात्मिक महत्त्व?

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क्यों लगता है चंद्र ग्रहण और क्या है इसका आध्यात्मिक महत्त्व?

Chandra Grahan Ka Adhyatmik Mahatva In Hindi: अक्सर हम रात के समय चाँद की शीतल चांदनी का आनंद लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब वही चाँद धीरे-धीरे अंधेर में खोने लगता है, तो वह केवल एक खगोलीय घटना नहीं होती? चंद्र ग्रहण का वह समय ब्रह्मांड की एक ऐसी घड़ी है, जो हमें बाहरी शोर से काटकर अपने भीतर झांकने के लिए मजबूर कर देती है।  

यह वह पल है जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा को ढंक लेती है, मानो प्रकृति हमें यह संदेश दे रही हो कि अंधेरा भी स्थायी नहीं है और आत्मज्ञान की रोशनी कभी भी फूट सकती है। आध्यात्मिक नजरिए से देखें तो चंद्रमा हमारे मन और भावनाओं का स्वामी है। जैसे समुद्र में लहरें चंद्रमा की स्थिति से प्रभावित होती हैं, वैसे ही हमारे भीतर की ऊर्जा भी ग्रहण के दौरान करवट बदलती है।

पौराणिक कथा: राहु, केतु और अमृत का रहस्य

पुराने समय के ऋषि-मुनि इस समय को बहुत कीमती मानते थे क्योंकि उनके अनुसार, जो शांति और एकाग्रता महीनों के ध्यान से नहीं मिलती, वह ग्रहण के कुछ घंटों में हासिल की जा सकती है। यह समय अपनी कमियों को त्यागने और नई ऊर्जा को समेटने का एक सुनहरा अवसर है।

भारतीय शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण की कहानी समुद्र मंथन से जुड़ी है। जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत के लिए संघर्ष हुआ, तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर अमृत वितरण किया। राहु नाम के एक राक्षस ने छल से अमृत पी लिया, जिसका पता सूर्य और चंद्रमा ने लगाया।

भगवान विष्णु ने क्रोधित होकर सुदर्शन चक्र से राहु का सिर काट दिया क्योंकि उसने अमृत पी लिया था, वह अमर हो गया। उसका सिर ‘राहु’ और धड़ ‘केतु’ कहलाया। माना जाता है कि इसी बदले की भावना से राहु और केतु समय-समय पर चंद्रमा को ग्रसते हैं, जिसे हम चंद्र ग्रहण कहते हैं।

क्या है चंद्र ग्रहण का आध्यात्मिक महत्त्व?

अध्यात्म में ग्रहण को एक शुद्धिकरण की प्रक्रिया माना जाता है। यहाँ इसके कुछ प्रमुख महत्त्व दिए गए हैं, जैसे-

  • अंतर्ज्ञान की जागृति: चंद्रमा हमारे अवचेतन मन का प्रतीक है। ग्रहण के समय बाहरी प्रकाश कम होता है, जिससे व्यक्ति को अपने भीतर की आवाज सुनने में मदद मिलती है।
  • मंत्र सिद्धि का समय: माना जाता है कि ग्रहण काल में किया गया एक माला जप सामान्य दिनों के हजारों जप के बराबर फल देता है। यह साधना के लिए सबसे शक्तिशाली समय है।
  • कर्मों का निपटारा: आध्यात्मिक गुरु मानते हैं कि इस दौरान ध्यान करने से पुराने संचित कर्मों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।

वैज्ञानिक तथ्य बनाम आध्यात्मिक विश्वास

जहाँ विज्ञान इसे पृथ्वी की छाया का खेल मानता है, वहीं अध्यात्म इसे ऊर्जा का खेल कहता है। आइए कुछ रोचक तथ्यों को देखते हैं।

विषयवैज्ञानिक दृष्टिकोणआध्यात्मिक/ज्योतिषीय दृष्टिकोण
कारणपृथ्वी का सूर्य और चंद्रमा के बीच आना।राहु-केतु द्वारा चंद्रमा को प्रभावित करना।
भोजनभोजन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।ऊर्जा दूषित होने के कारण सूतक काल में भोजन वर्जित।
प्रभावआँखों के लिए सुरक्षित (बिना चश्मे के देख सकते हैं)।नकारात्मक किरणों से बचने के लिए बाहर न निकलने की सलाह।

चंद्र ग्रहण के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

अपने मन और आत्मा को संतुलित रखने के लिए इन सरल बातों का ध्यान रखें, जैसे-

  1. ध्यान और मंत्र जप: ग्रहण के दौरान शांत बैठकर ओम नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का मानसिक जाप करें।
  2. सूतक का पालन: ग्रहण शुरू होने से पहले ही भोजन कर लें। मंदिर के पट बंद रखें और मूर्तियों को स्पर्श न करें।
  3. तुलसी के पत्ते: बने हुए भोजन और पानी में तुलसी के पत्ते डाल दें। माना जाता है कि तुलसी अपनी शुद्धता से नकारात्मक किरणों के प्रभाव को सोख लेती है।
  4. दान का महत्त्व: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, चीनी या सफेद वस्त्र का दान करें। इससे हमारी राशि का चंद्रमा मजबूत होता है।

निष्कर्ष

चंद्र ग्रहण डरने का नहीं, बल्कि ठहरने का समय है। यह प्रकृति का एक तरीका है हमें याद दिलाने का कि जीवन में उतार-चढ़ाव (छाया और प्रकाश) आते रहेंगे।

अगर आप इस समय का उपयोग शांति और प्रार्थना के साथ करते हैं, तो यह आपके मानसिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकता है।

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FAQs

1. क्या चंद्र ग्रहण को देखना सुरक्षित है?

उत्तर- हाँ, चंद्र ग्रहण को देखना पूरी तरह सुरक्षित है। इससे आँखों को कोई नुकसान नहीं पहुँचता, क्योंकि चंद्रमा का अपना कोई तीव्र प्रकाश नहीं होता।

2. सूतक काल में भोजन क्यों नहीं करना चाहिए?

उत्तर- आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान ब्रह्मांडीय ऊर्जा में बदलाव आता है, जिससे भोजन जल्दी दूषित हो सकता है।

3. ग्रहण के दौरान तुलसी के पत्ते का उपयोग क्यों किया जाता है?

उत्तर- तुलसी में अद्भुत औषधीय और एंटी-रेडिएशन गुण होते हैं, जो खाद्य पदार्थ को शुद्ध करते हैं।

4. ग्रहण समाप्त होने के बाद सबसे पहले क्या करना चाहिए?

उत्तर- ग्रहण खत्म होने के बाद सबसे पहले पूरे घर में गंगाजल छिड़कना चाहिए और स्वयं स्नान करना चाहिए।

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