Epstein Files: मोदी और भारत का ज़िक्र क्यों हुआ, जानिए वजह
आखिर क्यों पिछले समय से जेफ़री एपस्टीन की दुनियाभर में इतनी अधिक चर्चा देखनें को मिल रही है? जब भी आप दुनियाभर के सबसे अधिक विवादित और चर्चित व्यक्तियों के बारें में बात करेंगे, तो आपको उस सूची में जेफ़री एपस्टीन का नाम ज़रूर देखनें को मिलेगा।
हमेशा कोई भी व्यक्ति सिर्फ अपने अच्छे कार्यों से ही चर्चित नहीं होता है, बल्कि उसके द्वारा किए गए कुछ ऐसे अपराध भी होते हैं जो दुनियाभर में अधिक चर्चा का विषय बन जाते हैं। जेफ़री एपस्टीन के साथ भी कुछ ऐसा ही था। अमेरिका के इस करोड़पति व्यक्ति को यौन अपराध, नाबालिगों का शोषण और मानव तस्करी के आरोपों दोषी पाया गया था। वर्ष 2019 में उनकी जेल में मृत्यु हो गई थी।
बहुत कम लोग जानते हैं कि अमेरिका का यह निवेशक सिर्फ वित्तीय दुनिया में ही नहीं बल्कि सत्ताधारियों, राजनेताओं, शाही सदस्यों और उच्च‑स्तरीय बिज़नेस लीडर्स के साथ भी अपने नेटवर्क को लेकर दुनियाभर में एक चर्चा का बिंदु रहे हैं।
इतना ही नहीं, जेफ़री एपस्टीन ने अपने प्रभाव और धन का इस्तेमाल अत्यंत शक्तिशाली लोगों को अपने नेटवर्क में शामिल करने के लिए किया था।
एपस्टीन का केस और दुनिया भर में दस्तावेज़ों का खुलना
संयुक्त राज्य अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा वर्ष 2025‑26 के दौरान जेफ़री एपस्टीन से जुड़े लाखों पृष्ठों पर दस्तावेजों को सार्वजानिक किया गया था। इन ज़रूरी दस्तावेजों में ई‑मेल, फ़ोटोज़ और कॉल लॉग जैसी सामग्री मौजूद थी। इन सब बातों को देखकर साफ पता चलता है कि एपस्टीन का नेटवर्क कितना अधिक मजबूत और व्यापक था।
वर्तमान समय में एपस्टीन की ये फाइलें दुनिया भर में एक चर्चा का कारण बनीं हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इन दस्तावेज़ों में दुनियाभर के शीर्ष नेताओं, राजनेताओं और करोड़पतियों के नाम और ई‑मेल से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकरियाँ शामिल हैं।
यह बात सही है कि किसी के नाम का सिर्फ़ दस्तावेज़ों में आना, यह साबित नहीं करता कि उसने कोई अपराध किया हो या किसी अवैध गतिविधि में भाग लिया हो। किसी भी व्यक्ति को अपराधी साबित करने के लिए सबूत, गवाह और न्यायिक प्रक्रिया की आवश्यकता होती है।
एपस्टीन फाइल में नरेंद्र मोदी के नाम पर इतनी अधिक चर्चा क्यों?
हाल ही में सामने आई एपस्टीन फ़ाइलों में आपको भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम एक ई-मेल में आया है। इस फाइल में नरेंद्र मोदी का नाम आने की वजह सिर्फ इतनी थी कि उसमें उनके 2017 के इज़राइल दौरे का ज़िक्र किया गया था। ई-मेल की एक पंक्ति में आपको देखनें को मिलेगा, जिसमें “सलाह लेकर इज़राइल में नृत्य और गीत” जैसी बात कही गई थी, जबकि लोगों द्वारा ऐसे सवाल उठाए जा रहे थे कि नरेंद्र मोदी ने एपस्टीन से सलाह ली थी।
नरेंद्र मोदी पर लगाए गए आरोपों को भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा ख़ारिज कर दिया गया है। उन्होंने साफतौर पर कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सिर्फ अधिकारिक दौरे के संदर्भ में आया था। साथ ही विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा है कि एपस्टीन के बयान निराधार और कल्पनात्मक हैं, और उसका कोई महत्व नहीं है।
सरकार ने दो टूक कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भारत का एपस्टीन से कोई व्यक्तिगत या आधिकारिक संबंध नहीं रहा, और इस तरह की बातें बिना सबूत के फैलाई जा रही हैं।
एपस्टीन फाइल पर भारत की राजनीति और विपक्ष की प्रतिक्रियाएँ
एपस्टीन फाइल के सार्वजनिक तौर पर बाहर आने के बाद देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई हैं। नरेंद्र मोदी का नाम आने से विपक्ष के कई नेताओं द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर क्यों भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र के नाम का जिक्र इस एपस्टीन फाइल में हुआ है? विपक्ष पार्टी के इन सवालों का भारत सरकार द्वारा खंडन कर दिया गया है, साथ ही उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री के नाम पर भ्रान्ति फैलाई जा रही है।
इस बात से हर व्यक्ति अवगत होता है कि जब भी सार्वजनिक दस्तावेज़ों में किसी सार्वजनिक व्यक्ति का नाम आता है, लोग उसे अधिक गंभीरता से लेते हैं। लोगों को इस बात को भी समझना चाहिए कि डोक्यूमेंट्स में नाम होना खुद में किसी दोष या आपराधिक कृत्य का सबूत नहीं होता है।
एपस्टीन की मौत और विवाद
वर्ष 2019 में जेफ़री एपस्टीन को जेल में मृत पाया गया था जब वह बाल यौन शोषण और मानव तस्करी के संघीय आरोपों का सामना कर रहा था। मृत्यु की जाँच करने के बाद पता चला था कि जेफ़री एपस्टीन ने आत्महत्या की थी, लेकिन इसके बाद कई तरह के सवाल और सैद्धांतिक चर्चाएँ भी सामने आईं क्योंकि उसकी फाइलें और दस्तावेज़ सालों तक गोपनीय रहे।
FAQs –
Q. क्या जेफ़री एपस्टीन का नरेंद्र मोदी से कोई रिश्ता था?
A. नहीं, ऐसा कोई व्यक्तिगत या आधिकारिक रिश्ता नहीं था।
Q. एपस्टीन फाइल्स में मोदी का नाम क्यों आया?
A. सिर्फ उनके 2017 के इज़राइल दौरे के संदर्भ में।
Q. क्या मोदी ने एपस्टीन से कोई सलाह ली थी?
A. नहीं, विदेश मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया है।
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