Indore Water Contamination Tragedy: दूषित पानी पीने से गई 14 लोगों की जान
भारत के सबसे अधिक सुंदर शहर कहे जाने वाले इंदौर से एक बुरी ख़बर सामने आई है। जिसके बाद शहर के लोगों के साथ ही साथ सम्पूर्ण देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारे देश का सिस्टम सच में इतना कमजोर है ? जिसका फ़ायदा उठाकर निर्दोष लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जाता है।
इंदौर के भागीरथपुरा में नर्मदा जल सप्लाई में बहुत बड़ी लापरवाही देखनें को मिली है। यह लापरवाही इतनी बड़ी थी कि जिसके चलते 14 लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी है। जाँच के बाद पता चला है कि जिस पानी को आम पब्लिक के लिए सप्लाई किया जा रहा था उसमें मानव मल-मूत्र शामिल था।
Indore MGM Medical College ने की दूषित पानी की जाँच
इस दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान गई जबकि अधिक संख्या में लोग बीमार भी पड़ गए है। इंदौर के एमजीएममेडिकलकॉलेज और नगर निगम द्वारा गुरुवार को लैब में पानी की गुणवता की जाँच की गई थी।
जिसमें पता चला है कि जिस पानी को इंदौर के आम लोगों के लिए सप्लाई किया जा रहा था। उसमें ई-कोलाई और शिगेला जैसे घातक बैक्टीरिया मौजूद थे, जो सीधे तौर पर मानव मॉल में पाए जाते है। इस बात की अधिकारिक पुष्टि कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा की गई है।
दूषित पानी के चलते 14 लोगों की मृत्यु
इस दूषित पानी को पीने से भारी संख्या में लोग बीमार पड़ गए थे। जबकि 14 लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी है। अब इसको सिस्टम की लापरवाही कहे या फिर कुछ और परन्तु इस दूषित पानी के कारण करीबन 2800 को बीमार कर दिया है। इसमें से 201 लोग ऐसे हैं जिन्हें इंदौर के अलग - अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
201 मरीज में से 32 मरीज ऐसे थे जिन्हें ICU में भर्ती कराना पड़ा है। इन सभी मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। गुरुवार यानी की 1 जनवरी 2026 को इस दूषित पानी को पीने से भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के मरीज सामने आए। लेकिन इसमें कुछ मरीज ऐसे थे जिसने प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।
अगर आप इससे जुड़ा वीडियो देखना चाहते हैं, तो नीचे देखें।
क्यों आर्थिक सहयता मिलने पर भी लोगों में है गुस्सा
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा चार मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रूपये की आर्थिक सहायता दी गई थी। परन्तु आर्थिक सहायता देने के बाद, कई लोगों द्वारा नाराजगी भी जताई गई थी।
इसमें लोगों का कहना था कि सरकार द्वारा इस दूषित पानी की कारण मरने वाले लोगों की संख्या को छुपाया जा रहा है। इसपर मंत्री विजयवर्गीय ने इस बात को माना है कि मरने वालो की संख्या अधिक हो सकती है। साथ ही उन्होंने सम्पूर्ण मामले की जाँच के आदेश दे दिए है।
MHRC ने सम्पूर्ण मामले की रिपोर्ट को 2 हफ्ते में माँगा
इंदौर में हुई इस पूरी घटना का संज्ञान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा लिया जा रहा है। जिसके बाद, आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस भी कर दिया है। जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सम्पूर्ण मामले की विस्तृत रिपोर्ट को दो सप्ताह में माँगा है।
एनएचआरसी ने यह भी कहा कि खबरों के अनुसार, निरंतर दूषित पानी की शिकायतें सुनने को मिल रही है। शिकयतों के बाद भी अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई है?
2 जनवरी को को इंदौर हाईकोर्ट में होगी इस मामले की सुनवाई
मध्यप्रदेश के हुई इस दूषित पानी कांड के मामले को इंदौर हाईकोर्ट में प्रस्तुत दो जनहित याचिकाओं पर 2 जनवरी 2026 को सुनवाई की जाएगी। मध्यप्रदेश प्रशासन को इन दोनों याचिकाओं की स्टेटस रिपोर्ट को पेश करना होगा।
उन्हें कोर्ट में इस बात को बताना होगा कि भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड में अब तक कितने मरीज मिले हैं तथा कितने लोगों के लिए नि:शुल्क उपचार की व्यवस्था का प्रबंध किया गया है?
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