Vinod Kumar Shukla Passes Away: हिंदी साहित्य के स्तंभ विनोद कुमार शुक्ल का निधन, 89 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
Vinod Kumar Shukla Dies: हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार, कवि और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार 23 दिसंबर 2025 को रायपुर (छत्तीसगढ़) में निधन हो गया है।
वे 89 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे थे। चर्चित लेखक का निधन रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में हुआ, जहाँ उन्हें सांस लेने में कठिनाई के बाद 2 दिसंबर को भर्ती किया गया था।
उनके पार्थिव शरीर को पहले उनके निवास स्थान ले जाया जाएगा और फिर उनका अंतिम संस्कार होगा।
पाठकों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे विनोद कुमार शुक्ल
विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली लेखकों में से एक माने जाते थे।
उन्होंने अपनी लेखन शैली में सादगी, मनोवैज्ञानिक गहराई और मानवीय संवेदना का अद्वितीय संयोजन स्थापित किया, जिसने आम जनजीवन के अनुभवों को असाधारण सुंदरता से उकेरा।
उनकी कहानियाँ, कविताएँ और उपन्यास ऐसी आवाज़ बन गए, जो पाठकों के दिलों में हमेशा के लिए बसे रहेंगे।
हिंदी साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से थे सम्मानित
विनोद कुमार शुक्ल को 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जो हिंदी साहित्य का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। वे छत्तीसगढ़ से इस सम्मान को पाने वाले पहले लेखक थे।
यह पुरस्कार 21 नवंबर 2025 को उनके घर पर आयोजित समारोह में प्रदान किया गया था, जो उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें दिया गया था।
विनोद कुमार शुक्ल की लोकप्रिय रचनाएं और उनका प्रभाव
उनकी रचनाओं में कुछ अत्यंत लोकप्रिय और पाठकों के दिलों को छू लेने वाली किताबें शामिल हैं, जैसे– ‘नौकर की कमीज़’, ‘खिलेगा तो देखेंगे’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’, ‘एक चुप्पी जगह’ और कविताओं के संग्रह ‘लगभग जयहिंद’, ‘कभी के बाद अभी’ आदि।
इन रचनाओं ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया और आधुनिक हिंदी साहित्य में एक नई पहचान बनाई। शुक्ल का लेखन केवल कथा-उपन्यास या कहानी तक सीमित नहीं था; उनकी कविताएँ भी उतनी ही सराहनीय मानी जाती हैं।
उनके काव्य में साधारण जीवन की गंभीरता, मनुष्य के भीतर की सूक्ष्म भावनाएँ और जीवन के अनकहे पहलुओं की झलक मिलती थी, जिसने उन्हें व्यापक पाठक वर्ग और साहित्यिक समुदाय में विशेष स्थान दिलाया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
विनोद कुमार शुक्ल के निधन की खबर (Vinod Kumar Shukla Death News) से हिंदी साहित्य जगत में शोक की लहर है। देशभर से साहित्यकार उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
इसके अलावा राजनीति और सामाजिक क्षेत्र के तमाम अन्य व्यक्ति और संस्थाएँ भी शोक संदेश दे रही हैं और उनके कार्यों को याद कर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि शुक्ल जी का साहित्यिक योगदान अमूल्य है और उनकी कमी हिंदी साहित्य में हमेशा महसूस की जाएगी।
विनोद कुमार शुक्ल के परिवार में कौन-कौन है?
उनके परिवार में उनकी पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री हैं। विनोद कुमार शुक्ल के पुत्र ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनके पिता का स्वास्थ्य साल 2025 के बीच में पहले भी कमजोर हुआ था।
उन्हें अक्टूबर में अस्पताल में भर्ती किया गया था, लेकिन तब उनकी तबीयत में सुधार होकर उन्हें घर पर इलाज के लिए भेज दिया गया था। लेकिन दिसंबर में अचानक उनके स्वास्थ्य में गिरावट आई और उन्हें फिर से AIIMS ले जाया गया जहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली।
लेखन को काम नहीं, पूजा मानते थे विनोद कुमार शुक्ल
विनोद कुमार शुक्ल ने जीवन भर साहित्य को एक साधना की तरह अपनाया और वह आज हिंदी साहित्य के उन अनमोल लेखकों में हैं जिनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।
उनका जाना न सिर्फ उनके परिवार के लिए, बल्कि सम्पूर्ण साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
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FAQs
1. विनोद कुमार शुक्ल का निधन कब और कहां हुआ?
उत्तर- उनका निधन 23 दिसंबर 2025 को रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में हुआ।
2. विनोद कुमार शुक्ल को किस प्रमुख साहित्यिक सम्मान से सम्मानित किया गया था?
उत्तर- उन्हें 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था।
3. विनोद कुमार शुक्ल की प्रमुख साहित्यिक रचनाओं में कौन-सी शामिल हैं?
उत्तर- उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘नौकर की कमीज़’ और ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ शामिल हैं।
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