सेंसर विवाद में फंसी फिल्म जन नायकन को मिला रवि किशन का साथ
Jana Nayagan Controversy: साउथ सिनेमा के बड़े सितारे और अब राजनीति की ओर बढ़ चुके अभिनेता थलपति विजय की आने वाली फिल्म जन नायकन (Jana Nayagan) इन दिनों जबरदस्त विवादों में घिरी हुई है। यह फिल्म इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इसे विजय के अभिनय करियर की आखिरी फिल्म बताया जा रहा है।
फिल्म के जरिए विजय अपने प्रशंसकों को विदाई देना चाहते थे, लेकिन रिलीज़ से पहले ही यह फिल्म कानूनी और सेंसर से जुड़े मामलों में फंस गई है।
आखिर क्या है पूरा विवाद?
जन नायकन एक राजनीतिक और सामाजिक विषय पर आधारित फिल्म है। बताया जा रहा है कि फिल्म में आम जनता, राजनीति और सिस्टम से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को दिखाया गया है। जब फिल्म को रिलीज़ से पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास सर्टिफिकेट के लिए भेजा गया, तब बोर्ड ने फिल्म के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई।
CBFC की तरफ से कहा गया कि फिल्म में कुछ ऐसे सीन और डायलॉग हैं, जिन पर बदलाव या कट की ज़रूरत है। फिल्म निर्माताओं ने बोर्ड के निर्देशों के अनुसार फिल्म में कुछ संशोधन करते हुए बदलाव भी कर दिए लेकिन इसके बावजूद फिल्म को अंतिम प्रमाण पत्र नहीं मिला, जिससे इसकी रिलीज़ रुक गई।
कोर्ट तक पहुंचा मामला
जब लंबे समय तक कोई समाधान नहीं निकला, तो फिल्म के निर्माताओं ने कानूनी रास्ता अपनाया। पहले यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन वहां से भी तुरंत राहत नहीं मिली। इसके बाद केस मद्रास हाई कोर्ट में पहुंचा, जहां अलग-अलग स्तर पर सुनवाई हुई।
कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि फिल्म को रिलीज़ की अनुमति मिल जाएगी, लेकिन बाद में अदालत की एक बेंच ने पहले दिए गए आदेश को रद्द कर दिया। इसी वजह से फिल्म की रिलीज़ की तारीख एक बार फिर टाल दी गई। इस पूरी प्रक्रिया में फिल्म से जुड़े हजारों प्रशंसक निराश हुए और सिनेमा हॉल मालिकों को भी नुकसान उठाना पड़ा।
रवि किशन की एंट्री – क्यों अहम है उनका बयान?
इस पूरे विवाद के बीच भोजपुरी और हिंदी फिल्मों के जाने-माने अभिनेता और वर्तमान सांसद रवि किशन ने फिल्म जन नायकन को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक फिल्म का मामला नहीं है, बल्कि पूरे फिल्म उद्योग से जुड़ा मुद्दा है।
रवि किशन ने यह भी कहा कि अगर विजय या फिल्म से जुड़े लोग चाहें, तो वे उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे इस मामले में मदद करने के लिए तैयार हैं और ज़रूरत पड़ी तो इस मुद्दे को संसद में भी उठाएंगे।
उनका मानना है कि सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया में ईमानदार और समयानुसार फैसलों की ज़रूरत है, ताकि फिल्मों को बेवजह देरी का सामना न करना पड़े।
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फिल्म इंडस्ट्री पर असर
जन नायकन की रिलीज़ रुकने से सिर्फ निर्माता ही नहीं, बल्कि पूरा फिल्म उद्योग प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म के लिए पहले से बुक किए गए कई शो रद्द करने पड़े। कई दर्शकों को टिकट का पैसा वापस करना पड़ा, जिससे आर्थिक नुकसान भी हुआ।
इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी फिल्म को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। विजय के फैंस इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग सेंसर बोर्ड के फैसले को सही ठहरा रहे हैं। इस वजह से यह मुद्दा सिर्फ एक फिल्म तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।
विजय के राजनीतिक सफर से भी जुड़ा मामला
यह फिल्म इसलिए भी संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि विजय अब सक्रिय राजनीति में उतर चुके हैं। जन नायकन को उनके राजनीतिक विचारों और जनता से जुड़ाव के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में फिल्म पर सेंसर की सख्ती को कई लोग राजनीतिक नजरिए से भी देख रहे हैं।
हालांकि फिल्म के निर्माता और विजय की ओर से अब तक कोई गंभीर बयान नहीं दिया गया है। वे कानूनी प्रक्रिया के तहत ही समाधान चाहते हैं।
आगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें मद्रास हाई कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं। अगर कोर्ट से फिल्म को हरी झंडी मिलती है, तो जन नायकन जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज़ हो सकती है।
वहीं रवि किशन जैसे नेताओं का समर्थन मिलने से फिल्म निर्माताओं को नैतिक और राजनीतिक ताकत भी मिलती नजर आ रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट और सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है।
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FAQs
1. फिल्म जन नायकन विवाद में क्यों फंसी है?
उत्तर- फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से अभी तक अंतिम सर्टिफिकेट नहीं मिला है, जिस कारण इसकी रिलीज़ रुकी हुई है।
2. रवि किशन ने इस मामले में क्या कहा है?
उत्तर- रवि किशन ने कहा है कि वे विजय या फिल्म निर्माताओं की मदद के लिए तैयार हैं और ज़रूरत पड़ी तो इस मुद्दे को संसद में भी उठाएंगे।
3. जन नायकन फिल्म कब रिलीज़ होगी?
उत्तर- फिलहाल फिल्म की रिलीज़ डेट तय नहीं है, क्योंकि मामला मद्रास हाई कोर्ट में लंबित है।
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