गैस संकट में बड़ी राहत, भारत पहुंचे ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ एलपीजी टैंकर

Shivalik and Nanda Devi LPG Tanker Arrived India: मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और युद्ध के कारण दुनिया के सबसे महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से जहाजों का गुजरना मुश्किल हो गया था। इसी बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है कि दो भारतीय एलपीजी टैंकर वाले जहाज शिवालिक और नंदा देवी ने सुरक्षित रूप से यह खतरनाक रास्ता पार कर लिया है।
Shivalik and Nanda Devi LPG Tanker Arrived India
ये दोनों जहाज एलपीजी गैस लेकर भारत में अपनी मंजिल तक सफलतापूर्वक पहुंचने में कामयाब रहे हैं। आपको बता दें कि इस गैस की खेप से भारत को एलपीजी आपूर्ति में काफी मदद मिलेगी क्योंकि ये घरों और उद्योगों के लिए बहुत जरूरी है।
सुरक्षित पहुंचे शिवालिक और नंदा देवी गैस टैंकर
भारत के घरों में रसोई गैस ज्यादातर मध्य पूर्व से ही आती है। लगभग नब्बे प्रतिशत गैस भारत इसी रास्ते से आयात करता है और अगर यह मार्ग बंद या जोखिम भरा हो जाए तो घरेलू आपूर्ति प्रभावित होती है।
इसी बीच शिवालिक और नंदा देवी जैसे बड़े जहाज़ों का सुरक्षित आने का मतलब है कि देश को एलपीजी गैस की कमी से बचाया जा सकेगा।
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शिवालिक में आई 46,000 मीट्रिक टन गैस
पहला टैंकर शिवालिक कतर के रास लाफ़ान इंडस्ट्रीयल सिटी से लगभग चार से पाँच दिन की यात्रा के बाद गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुँचा। इस जहाज़ में लगभग 46,000 मीट्रिक टन गैस थी, जो भारत की घरेलू गैस आपूर्ति में एक महत्त्वपूर्ण योगदान देगी।
इस दौरान जहाज को समुद्र में भारतीय नौसेना के जहाजों के साथ सुरक्षित मार्गदर्शन भी मिला, ताकि किसी भी खतरे से निपटा जा सके।
वाडिनार पोर्ट पर उतरा नंदा देवी टैंकर
पहले टैंकर के ठीक बाद दूसरा टैंकर नंदा देवी भी सुरक्षित रूप से गुजरात के वाडिनार पोर्ट पर लैंड हुआ। इस जहाज़ में लगभग 46,500 मीट्रिक टन एलपीजी थी, जो शिवालिक के सामान भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर लाया है।
इन दोनों जहाज़ों ने मिलाकर लगभग 92,500 टन गैस भारत के लिए लाकर दी है, जो घरेलू गैस संकट में बड़ी राहत बन सकती है।
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होर्मुज़ पार करने में क्यों थी कठिनाई?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ एक बेहद संवेदनशील समुद्री रास्ता है जहाँ से दुनिया का लगभग बीस प्रतिशत तेल और गैस होकर गुजरता है। लेकिन हाल में वहां यूएस‑इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से कई जहाजों ने धीमा रुख अपनाया, जिससे सप्लाई लाइन पर दबाव पड़ा।
ऐसी स्थिति में शिवालिक और नंदा देवी जैसे जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिलना भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक सफलता है। इन जहाजों का सुरक्षित भारत आना संकेत देता है कि मध्य पूर्व के हालात के बीच भी भारत को ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित रखने के प्रयास हो रहे हैं।
सरकार और नौसेना की भूमिका
भारत सरकार और नौसेना दोनों ने मिलकर इन टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित की। नौसेना ने जहाजों को समुद्री मार्ग पर सुरक्षा कवच दिया और सरकारी एजेंसियों ने कूटनीतिक स्तर पर आवश्यक बातचीत की, ताकि दोनों जहाज बिना किसी बड़ी समस्या के भारत पहुँच सकें।
एलपीजी गैस आपूर्ति में मिलेगी काफी मदद
इन जहाज़ों के सुरक्षित पहुंचने से भारत को रसोई गैस की आपूर्ति जारी रखने में मदद मिलेगी और पेट्रोलियम कंपनियों को घरेलू मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
इससे घरों में सिलेंडर की कमी जैसी कठिनाइयों के कम होने की उम्मीद है। हालांकि युद्ध और तनाव की स्थिति बनी हुई है लेकिन इन जहाज़ों के आने से ऊर्जा सप्लाई की चिंता थोड़ी कम हुई है।
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FAQs
1. शिवालिक और नंदा देवी टैंकर कहाँ से आए?
उत्तर- ये टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से होकर सुरक्षित भारत पहुँचे।
2. शिवालिक और नंदा देवी टैंकरों में क्या था?
उत्तर- इन दोनों टैंकरों में कुल 92,500 मीट्रिक टन एलपीजी गैस थी।
3. भारत के लिए शिवालिक और नंदा देवी टैंकरों का क्या महत्त्व है?
उत्तर- इससे घरेलू रसोई गैस और उद्योगों की आपूर्ति में राहत मिलेगी।
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