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मिडल ईस्ट में महायुद्ध: खाड़ी देशों की ट्रंप को चेतावनी, अब क्या होगा?

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मिडल ईस्ट में महायुद्ध: खाड़ी देशों की ट्रंप को चेतावनी, अब क्या होगा?

Gulf Countries Pressure on US Iran War News in Hindi : मिडल ईस्ट की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह कहना सही है कि मिडल ईस्ट की जमीन इस समय बारूद के ढेर की तरह दिख रही है। जैसा कि आपको पता है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी इस भीषण जंग को आज 2 हफ्तों से अधिक का समय हो गया है।

Gulf Countries Pressure on US Iran War News in Hindi

खाड़ी देशों का बदला हुआ रुख

बीते कुछ दिनों में सबसे बड़ा उलटफेर हुआ है खाड़ी देशों के रुख में, जो अब अमेरिका को लेकर पूरी तरह बदल चुका है। ऐसा बताया जा रहा है कि जो देश पहले युद्ध के खिलाफ थे, आज वही अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दे रहे हैं कि "काम अधूरा मत छोड़ना!"

ईरान ने पार की सारी हदें

सच तो यह है कि पिछले तीन हफ्तों में ईरान ने वो किया जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। खाड़ी देशों का कहना है कि ईरान ने सीधे सऊदी अरब और यूएई (UAE) के एयरपोर्ट, बंदरगाहों और तेल सुविधाओं को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया है। इस हमले में खाड़ी देशों भारी नुकसान झेलना पड़ा है।

इतना ही नहीं, ईरान ने दुनिया की तेल की लाइफलाइन यानी 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को भी लगभग बंद कर दिया है। ईरान के इस फैसले के बाद, खाड़ी देशों के नेताओं का कहना है कि ईरान ने अब सारी हदें पार कर दी हैं। अब सवाल यह नहीं है कि युद्ध कब रुकेगा, बल्कि इस बात का है कि क्या ईरान की ताकत पूरी तरह खत्म हो पाएगी?

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खाड़ी देशों का विरोध

क्या आप जानते हैं? जब अमेरिका-इजरायल और ईरान की ये जंग शुरू हुई थी, तब सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने इसका कड़ा विरोध किया था। इन सभी देशों को इस बात का डर था कि अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण उनकी अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।

हाल ही में, ईरान ने इन सभी देशों के तेल कुओं और डीसेलिनेशन प्लांट पर सीधे हमले किए, जिसके बाद उनकी सोच बदल गई।

गल्फ रिसर्च सेंटर के अध्यक्ष अब्दुल अजीज सागर का कहना है कि “शुरुआत में हमने ईरान का बचाव किया, लेकिन अब वो हमारा दुश्मन है। उन्हें रोकने का अब एक ही तरीका है और वो है उनकी सैन्य शक्ति को पूरी तरह खत्म देना।”

ईरान की हालिया स्थिति को देखते हुए खाड़ी देशों को अब सबसे बड़ा डर इस बात का है कि अगर अमेरिका और इजरायल ने ईरान को 'अधमरा' छोड़कर हमला रोक दिया, तो ईरान भविष्य में और भी ज्यादा आक्रामक और खतरनाक हो जाएगा।

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ट्रंप पर दबाव और खाड़ी देशों की उलझन

बात ज़रूर थोड़ी अटपटी है लेकिन यह सच है कि एक तरफ खाड़ी देश चाहते हैं कि अमेरिका ईरान की कमर तोड़ दे, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन पर एक अलग तरह का दबाव बना रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि इस युद्ध में खाड़ी देश भी सीधे तौर पर शामिल हों।

हालांकि, यूएई जैसे देश अभी भी कतरा रहे हैं। वे नहीं चाहते कि उनकी पर्यटन वाली छवि को और नुकसान पहुंचे, लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि अपनी सुरक्षा के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बनी दुनिया की दुखती रग

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर कब्जा करके पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को बंधक बना लिया है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा, तो न केवल तेल की कीमतें आसमान छूएंगी, बल्कि खाड़ी देशों का व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस बार ईरान की हमला करने की क्षमता को स्थापित तौर पर खत्म नहीं किया गया, तो यह खतरा हमेशा के लिए बना रहेगा।

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सऊदी अरब की आखिरी चेतावनी

फिलहाल, सऊदी अरब सीधे तौर पर इस युद्ध में शामिल होने से डर रहा है, लेकिन रियाद ने अमेरिका को साफ संदेश भेज दिया है। अगर ईरान ने उनके पानी साफ करने वाले प्लांट या मुख्य तेल रिफाइनरियों पर अगला हमला किया, तो सऊदी अरब अपनी पूरी ताकत के साथ जवाबी कार्रवाई करेगा।

निष्कर्ष

मिडल ईस्ट में जारी इस संघर्ष को देखकर आपको एक बात का तो अच्छे से पता चल गया होगा कि अब इस युद्ध को रोकने के लिए पुरानी कूटनीति काम नहीं आएगी। खाड़ी देशों का ट्रंप पर दबाव बनाना इस बात का संकेत है कि वे अब ईरान के साये में और नहीं जी सकते। सवाल अब यह है कि क्या अमेरिका इस काम को पूरा करेगा, या एक बार फिर मिडल ईस्ट को जलता हुआ छोड़कर पीछे हट जाएगा?

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