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वेनेज़ुएला vs दुनिया : तेल, राजनीति और शेयर बाज़ार की लड़ाई

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वेनेज़ुएला vs दुनिया : तेल, राजनीति और शेयर बाज़ार की लड़ाई

आखिर क्यों वेनेज़ुएला को वर्तमान समय में आर्थिक संकट, महंगाई और राजनीतिक उथल-पुथल जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं? बहुत कम लोग इस बारें में जानते होंगे कि वेनेज़ुएला पर बहुत बड़े-बड़े तेल भंडार हैं।

सच माने तो वेनेज़ुएला के पास इतना तेल है जिसके इस्तेमाल से देश की गरीबी को खत्म करके उसे इतना अमीर बना सकता है जिसके बाद वह दुनिया के अमीर देशों से टक्कर ले सकें।

यह सब बातें सुनकर आपके मन में एक सवाल आ रहा होगा कि जब वेनेज़ुएला के पास इतना तेल है तो क्यों वह अपने देश की गरीबी को खत्म नहीं कर पा रहा है। तेल के भंडार के कारण ही दुनिया के शक्तिशाली देश विशेषकर अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला की राजनीति में अधिक रूचि दिखा रहा है।

वेनेज़ुएला का तेल इतिहास

अबतक आप इस बात को अच्छे से जान चुके होंगे कि वेनेज़ुएला तेल भंडार के मामले में दुनियाभर के शक्तिशाली देशों से आगे हैं। आंकड़ों के अनुसार, वेनेज़ुएला के पास लगभग 303-304 अरब बैरल तेल हैं जोकि दुनिया के कुल तेल भंडार के करीब 18-20% प्रतिशत है।

आपको पता है कि वेनेज़ुएला में तेल की खोज कब की गई थी? वेनेज़ुएला में वर्ष 1900 में तेल की खोज की गई थी। उस समय वेनेज़ुएला एक साधारण-सा कृषि प्रधान देश था।

वर्ष 1920 में दुनियाभर की बड़ी-बड़ी कम्पनियों द्वारा वेनेज़ुएला में ड्रिलिंग करना शुरू कर दिया गया था। जिसके कुछ समय बाद वेनेज़ुएला का नाम दुनिया के बड़े-बड़े तेल निर्यातक देशों में शामिल हो गया था। जिससे देश की अर्थव्यवस्था में तेज़ी आने लगी थी।

वेनेज़ुएला तेल उत्पादन में भारी गिरावट

यदि हम वर्ष 1970 की बात करें तो इस समय वेनेज़ुएला का तेल उत्पादन बहुत अच्छा था। इस समय लगभग 3.5 से 3.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन वेनेज़ुएला द्वारा किया जा रहा था।

वही आज के समय में इसकी तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी हैं, क्योंकि तेल उत्पादन 3.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर 1.0–1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है, जोकि पूरी दुनिया का केवल 0.8–1% ही है।

“Drill Baby Drill” और ट्रंप की ऊर्जा नीति

अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा दिए गए नारे "Drill Baby Drill" का क्या मतलब है? आखिर डोनाल्ड ट्रम्प का यह नारा किस सोच का प्रतीक है? डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि अमेरिका को उर्जा के लिए अन्य किसी भी देश पर निर्भर न रहना पड़े।

दुनिया के कई बड़ी कंपनी द्वारा कहा गया है कि वे वेनेज़ुएला में इतनी जल्दी निवेश के लिए तैयार नही हैं। जिसमें Chevron, ExxonMobil और ConocoPhillips का नाम शामिल हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेज़ुएला के तेल ढांचे को पूरी तरह से पुनर्निर्माण करने में कम से कम 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश, समय और राजनीतिक स्थिरता की सबसे अधिक ज़रूरत पड़ेगी।

अमेरिका में अधिक से अधिक तेल-गैस की ड्रिलिंग की जाए। जिसके लिए उन्होंने वेनेज़ुएला के उर्जा संसाधनों पर अपनी पकड़ बनाना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, अमेरिका बहुत जल्द वेनेज़ुएला में अरबों डॉलरों का निवेश भी कर सकता है।

तेल और शेयर बाजार पर असर

हाल ही में, अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला पर हुई सैन्य करवाई के कारण दुनिया के शेयर बाजार में तेज हलचल देखनें को मिली। कार्यवाई के बाद, Dow Jones इंडस्ट्रियल एवरेज करीबन 700 पॉइंट उछल गया, क्योंकि निवेशकों ने तेल, ऊर्जा और रक्षा कंपनियों में खरीद को अधिक तेज गति प्रदन की थी।

यदि अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला के तेल भंडार पर नियंत्रण करने के बाद, अमेरिकी कंपनी के लिए नए अवसर पैदा किए जाएंगे।

अमेरिका - वेनेज़ुएला विवाद का असर हमें भारत पर भी देखनें को मिल रहा है। अमेरिका की कार्यवाई के चलते ही भारत में भी तेल और रिफाइनिंग से जुड़े शेयरों में भारी उछाल देखा गया हैं।

लेकिन इसके साथ ही एक नुकसान भी है, क्योंकि अगर ये भू-राजनितिक तनाव लंबा चला तो इससे तेल की कीमतों में अधिक वृद्धि हो सकती है। तेल महंगा होने के कारण आपको ईंधन खर्च और व्यापार घाटा जैसे मुद्दों पर भारत जैसे आयातक देशों को दबाव देखनें को मिल सकता हैं।

अमेरिका से पहले इन देशों से भी रहें हैं वेनेज़ुएला के विवाद

क्या आपको पता है कि अमेरिका से पहले भी वेनेज़ुएला कई देशों के साथ विवादों में रहा है? वेनेज़ुएला का सबसे बड़ा मामला गुयाना के साथ Essequibo सीमा विवाद का है, जहाँ पर दोनों देशों द्वारा लगभग 1.6 लाख वर्ग किमी जमीन पर दावा किया गया था। जबकि कोलंबिया के साथ वेनेज़ुएला का सीमा, ड्रग-तस्करी और सुरक्षा को लेकर तनाव देखा गया था।

इन दो देशों के अलावा, ब्राज़ील के साथ शरणार्थियों के मुद्दों ने दोनों देशों के रिश्तों को बिगाड़ दिया था। ब्राजील के साथ ही ब्रिटेन भी इस विवाद शामिल था, क्योंकि गुयाना पर उसके औपनिवेशिक दौर में ही सीमा का फैसला हुआ था, जिसको वेनेज़ुएला द्वारा गलत माना गया था।

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