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लारीजानी की मौत: क्या अब बिखर जाएगा ईरान का सुरक्षा कवच?

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लारीजानी की मौत: क्या अब बिखर जाएगा ईरान का सुरक्षा कवच?

Ali Larijani Death Impact on Iran in Hindi : खबरों की मानें, तो ईरान की राजनीति और सुरक्षा की दुनिया में अली लारीजानी एक बड़ा नाम थे, जिनकी पकड़ कूटनीति से लेकर युद्ध के मैदान तक मजबूत थी। हाल ही में, ईरान पर किए गए इजरायली हमले में ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की मौत हो गई है।

ऐसा बताया जा रहा है कि लारीजानी की मौत ने न केवल इस्लामिक रिपब्लिक को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि मध्य-पूर्व की भू-राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है।

Ali Larijani Death Impact on Iran in Hindi

क्या आप जानते हैं कि लारीजानी महज एक अधिकारी नहीं थे, बल्कि वे ईरान की डिप्लोमेसी, इंटेलिजेंस और मिलिट्री पावर को जोड़ने वाली सबसे मजबूत कड़ी थे। उनकी मौत के बाद, ईरान के साथ ही साथ दुनियाभर के लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या अब ईरान का सुरक्षा ढांचा बिखर जाएगा?

सुलेमानी की याद दिलाती एक और बड़ी क्षति

अली लारीजानी की मौत के बाद कई लोगों का ऐसा कहना है कि इस घटना ने साल 2020 में हुई जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के जख्मों को हरा कर दिया है। हकीकत तो यह है कि जिस तरह सुलेमानी ईरान के बाहरी ऑपरेशन्स के मास्टरमाइंड थे, उसी तरह लारीजानी देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा नीतियों के रणनीतिकार थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि लारीजानी की कमी से ईरान की जोखिम आंकने की क्षमता कमजोर होगी। सुलेमानी के जाने के बाद जो तालमेल की कमी देखी गई थी, लारीजानी की मौत उस बिखराव को और गहरा कर सकती है।

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एक 'पुल' जो अब टूट चुका है

ताजा खबरों के अनुसार, मशहूर पत्रकार क्रिश्चियन अमनपौर की रिपोर्ट से यह पता चला है कि पश्चिमी देशों को भरोसा था कि अली लारीजानी ही वो इंसान हैं, जो ईरान के पुराने और नए दौर के बीच एक 'पुल' की भूमिका निभा सकते थे।

ऐसा बताया जाता है कि वे कट्टरपंथ और बातचीत, दोनों के बीच तालमेल बिठाने में माहिर थे। उनके जाने के बाद अब ईरान के पास ऐसा कोई बड़ा नेता नहीं बचा, जो दुनिया से बात भी कर सके और देश की सुरक्षा के कड़े फैसले भी ले सके।

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लारीजानी का जनरल से रणनीतिकार तक का सफर

बात थोड़ी अटपटी है लेकिन यह सच है कि लारीजानी का करियर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) में ब्रिगेडियर जनरल के रूप में अपनी शुरुआत की।

इसके अलावा, लारीजानी ने वर्ष 1994 से 2004 के दौरान 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग' (IRIB) के प्रमुख के रूप में काम किया था, जहाँ उन्होंने मीडिया और खुफिया सेवाओं को जोड़कर शासन के प्रति वफादारी को मजबूत किया थी।

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ईरान काबिखरता हुआ सुरक्षा ढांचा?

फिलहाल, लारीजानी की मौत के बाद ईरान का सुरक्षा तंत्र अब छोटे-छोटे हिस्सों में काम कर रहा है। इस समय में ईरान की सत्ता की चाबी केंद्र के बजाय स्थानीय मौलवियों के हाथों में है।

  • ईरान का इंटेलिजेंस फेलियर: हाल ही में हुए इजरायली हमले में लारीजानी की मौत ने यह साबित कर दिया है अब ईरान के सुरक्षा घेरे में बड़ी सेंध लग चुकी है।
  • ईरान पर जवाबी कार्रवाई का दबाव: लारीजानी के साथ उनके बेटे और बॉडीगार्ड की मौत ने IRGC पर जवाबी हमले का भारी दबाव बना दिया है।

निष्कर्ष

ईरान के सुरक्षा कवच कहे जाने वाले लारीजानी की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव की कमान अब किसके हाथ में होगी? क्या ईरान किसी कट्टरपंथी चेहरे को सामने लाएगा या फिर कोई ऐसा रणनीतिकार मिलेगा जो लारीजानी की तरह बिखरे हुए हिस्सों को जोड़ सके?

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न : अली लारीजानी कौन थे?

उत्तर : अली लारीजानी ईरान की सुरक्षा परिषद के सचिव और एक बड़े रणनीतिकार थे, जो सरकारी बातचीत और फौज की ताकत को एक साथ लेकर चलने में माहिर थे।

प्रश्न : अली लारीजानी मौत ईरान के लिए बड़ी क्षति क्यों है?

उतर : ईरान के लिए बड़ा नुकसान इसलिए है क्योंकि अली लारीजानी एक परमाणु नीति, खुफिया जानकारी और सैन्य कमान को जोड़ने वाली अहम कड़ी थे। उनके जाने से ईरान की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होगी।

प्रश्न : लारीजानी की मौत का इजरायल-ईरान संघर्ष पर क्या असर पड़ेगा?

उत्तर : इससे ईरान के भीतर जवाबी कार्रवाई का दबाव बढ़ेगा, लेकिन साथ ही उसकी रक्षात्मक और खुफिया रणनीति कमजोर हो सकती है।

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