जानिए महिलाओं में हार्मोन असंतुलन के लक्षण, कारण और उपचार!
आजकल के समय में बहुत-सी समस्याओं का समाना करना पड़ता है इसलिए कई तरह-तरह की समस्या शरीर में दिखाई देना अब आम होता जा रहा है। इन सबमें सबसे आम महिलाओं में हार्मोन से जुड़ी समस्या सामने आ रही है इलसिए आज इस समस्या के बारे में आज हम विस्तार से समझेंगे और इसके लक्षण, कारण, उपाय के बारे में जानेगे!
आखिर हार्मोन क्या होते हैं? (What are hormones in hindi?)
सबसे पहले समझते हैं कि आखिर हार्मोन होते क्या है जिसके असंतुलन के कारण में शरीर में क्या बदलाव होते हैं। अगर हम संक्षेप में कहे तो हार्मोन शरीर का वह पदार्थ है, जिसका निर्माण हमारे शरीर में स्वाभाविक रूप से होता है। इस हार्मोन के कारण ही हमारे शरीर में विभिन्न तरह के काम सफलता रूप से हो पाते हैं। महिलाओं के शरीर में हार्मोन के संतुलन को बनाए रखना बेहद ज़रूरी होता है इलसिए उनको कई बातों का खासतौर पर अधिक ख्याल रखना पड़ता है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है स्वस्थ आदत का पालन करना।

महिलाओं में कितने प्रकार के हार्मोन होते हैं? (female hormone imbalance symptoms in hindi)
महिलओं में 5 तरह के हार्मोन होते हैं जिनका संतुलन बनाए रखना बेहद ज़रूरी है, आइए समझते हैं कि वह कौन-से हर्मोन है जो एक महिला के शरीर में मौजूद होते है।
टेस्टोस्टेरोन
लोगों को लगता है कि यह हार्मोन सिर्फ पुरुषों में मौजूद होता है लेकिन यह पुरुष और महिलाओं दोनों में ही पाया जाता है। वैसे तो यह हार्मोन महिलाओं में कम होता है, जिसके कारण इसे पुरुष हार्मोन कहा जाता है। टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का काम सेक्स ड्राइव, मांसपेशियों और हड्डियों की सेहत यानी स्वास्थ्य को बनाए ररखने का होता है।
एस्ट्रोजन
इस हार्मोन को फीमेल हार्मोन भी कहते हैं, जिसका काम पीरियड्स साइकिल, प्रजनन क्षमता और गर्भावस्था की स्थिति को संतुलित यानी बैलेंस करना होता है। इस हर्मोन की मदद से महिलाओं की हड्डियों और हृदय का स्वास्थ्य दुरुस्त रहता है।
प्रोजेस्टेरोन
अगर इस हार्मोन की बात करें तो यह एक ऐसा हार्मोन है, जो महिला की बच्चेदानी को प्रेगनेंसी के लिए तैयार करता है। इसका काम पीरियड्स साइकिल को संतुलित बनाए रखने का भी होता है।
कोर्टिसोल
जब किसी भी कारण तनाव होता है तब उस समय इस हार्मोन का उत्पादन होता है। इसकी मदद से शरीर खतरों को जवाब देने के लिए खुद को तैयार करने लगता है, लेकिन हाई कोर्टिसोल लेवल समय के साथ स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।
थायराइड हार्मोन
इस हार्मोन का सीधा संबंध असर शरीर के मेटाबॉलिज्म, हृदय की गति और शरीर के तापमान से जुड़ा हुआ होता है। इस हार्मोन की मदद से यह सभी काम अच्छे से हो सकते हैं। लेकिन, थायराइड लेवल कम होने के कारण थकान, वजन बढ़ना और बालों के झड़ने आदि जैसी समस्याएं देखने को मिलती है साथ ही अगर थायराइड लेवल अधिक हो जाए तब ही कई तरह की समस्याओं के लक्षण दिखाई देते हैं।
हार्मोन असंतुलन क्या होता है? (What is hormone imbalance?)
हार्मोन असंतुलन (hormonal changes) शरीर में वह स्थिति है, जिसमें शरीर में एक या उससे अधिक हार्मोन का संतुलन बिगड़ने लग जाता है। हार्मोन एक कम्युनिकेटिंग एजेंट है, जो कि रक्त के प्रवाह के माध्यम से हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं को संदेश भेजने का काम करता है। इसके कारण शरीर में ग्रोथ, मेटाबॉलिज्म, और फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
क्या है महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के लक्षण (Symptoms of hormonal imbalance in women in hindi)
महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कई लक्षण दिखाई दे स्टे हैं जो कि इस प्रकार हैं -
मूड स्विंग होना
एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं के व्यवहार में बदलाव के कारण बनता है। एस्ट्रोजन हार्मोन का कम-ज्यादा या उतार-चढ़ाव को प्रीमेन्स्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) कहते हैं, जिसके कारण डिप्रेशन जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है।
भारी व दर्दनाक पीरियड्स
किसी भी कारणवश अगर शरीर में एस्ट्रोजन लेवल में उतार-चढ़ाव होता है तो इस कारण पेट में दर्द, पीठ के निचले भाग में दर्द, बार-बार पेशाब आना, कब्ज, संभोग के दौरान दर्द और पीरियड्स के दौरान भारी रक्त हानि आदि जैसी समस्या का समाना करना पड़ सकता है।
कम सेक्स ड्राइव
शरीर में अगर हार्मोन में बदलाव की वजह से मेनोपॉज की स्थिति भी शुरू होती हुई नज़र आ सकती है, लेकिन इसके कारण सेक्स ड्राइव में कमी आ जाती है। इसके साथ चिंता, थकान, मूड स्विंग और बहुत ज्यादा पसीना आने जैसी समस्या पैदा हो सकती है।
अनिद्रा
एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन दोनों ही ऐसे हार्मोन है, जिसका संबंध सीधा आपकी नींद होता है। यही वजह है कि हार्मोन के गिरते लेवल के कारण नींद में भी खलल पड़ने लग जाता है।
वजन बढ़ना
शरीर में जब हार्मोन का काम सटीक वजन को बनाए रखने का होता है लेकिन इनमें किसी भी तरह का अंसुतलन होता है, इसका सीधा असर वजन पर दिखाई देता है। अचानक से वजन बढ़ने लग जाता है और पेट के आस-पास फैट भी धीरे-धीरे जमा होने लग जाता है।
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क्या है महिलाओं में हार्मोन असंतुलन के कारण (Causes of hormonal imbalance in women in hindi)
महिलाओं में हार्मोन असंतुलन के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें से कुछ मुख्य कारणों के बारे हमने नीचे जानकारी दी है -
- क्रोनिक या ज़रूरत से तनाव और डायबिटीज जिसमें टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह शामिल हो, वो महिलाओं में हार्मोन असंतुलन के मुख्य कारणों की सूची में सबसे ऊपर हैं।
- इसके बाद कुशिंग सिंड्रोम, एडिसन रोग और हाइपोथायरायडिज्म सहित थायरॉयड और एड्रेनल ग्रंथि से संबंधी समस्याएं भी महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन की मुख्य वजह बनती है।
- खराब आहार, मोटापा और जीवनशैली से जुड़े कारकों से हार्मोन में असंतुलन देखने को मिलता है।
- कुछ दवाएं है जिसके कारण भी हार्मोन से जुड़ी समस्या हो सकती है जिसमें शामिल है जन्म नियंत्रण और एनाबॉलिक स्टेरॉयड के साथ हार्मोन थेरेपी जो इसका मुख्य कारण है।
- टर्नर सिंड्रोम और प्रेडर-विली सिंड्रोम, आनुवंशिक और वंशानुगत स्थितियां भी हार्मोन से जुड़ी समस्या का कारण हो सकती है।
- एंडोक्राइन सिस्टम में ट्यूमर या सिस्ट, चाहे कैंसरयुक्त हों या नॉन-कैंसरयुक्त, ये भी महिलाओं में हार्मोन से जुड़ी समस्या की वजह बन सकती है।
- एंडोक्राइन -डिसरप्टिव केमिकल, प्रदूषकों और विषाक्त पदार्थों जैसे कि कीटनाशक, शाकनाशी आदि के संपर्क में आना भी हार्मोन से जुड़ी समस्या का कारण बन सकती है।
- ग्लैंड के काम को प्रभावित करने वाली कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी जैसे कि कैंसर उपचार आदि भी कई बार हार्मोन की समस्या की वजह बन सकता है।
- फर्टिलिटी संबंधी विकार (signs of hormonal problems), जैसे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) और समय से पहले मेनोपॉज का आ जाना आदि भी महिलाओं में हार्मोन के असंतुलित होने की वजह बन जाता है।
क्या है महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के उपचार (Treatment of hormonal imbalance in women in hindi)
महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के इलाज (curing hormonal imbalance) के लिए विभिन्न प्रकार के विकल्प मौजूद है जिसकी मदद से आप हार्मोन से जुड़ी समस्या में सुधार ला सकती है-
आहार में बदलाव
सबसे पहले आप कोशिश करें कि आप ऐसे आहार का चुनाव का सेवन करें, जो पोषक तत्वों से भरपूर हो। इसके अतिरिक्त स्वस्थ वसा को आहार में शामिल करते हुए कॉम्प्लेक्स कार्ब्स से दूरी बनाएं। फल और सब्जियों की मात्रा को अपनी डाइट में बढ़ाएं और खुदको हाइड्रेट रखें।
तनाव प्रबंधन
अपने तनाव को कम करने के लिए आप मेडिटेशन, योग और अनुलोम-विलोम आदि की मदद ले सकती हैं। इससे स्ट्रेस लेवल तो कम होता ही है, साथ बीपी भी संतुलित रखने में मदद मिलती है।
सप्लीमेंट्स
ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन डी और हर्बल दवाएं आदि कुछ सप्लीमेंट है जो मददगार साबित हो सकते हैं। लेकिन इन सप्लीमेंट को बिना डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन के नहीं ले सकते और सप्लीमेंट का सेवन करने से पहले डॉक्टर से राय लें।
दवा
कई बार महिलाओं को हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने के लिए डॉक्टर के द्वारा दी गई दवाएं और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की मदद लेनी पड़ सकती हैं।
जीवन शैली बदलाव
स्वस्थ आदतों को अपनाएं और अस्वस्थ आदतों को धीरे-धीरे कम करते हुए छोड़ दें। सही समय पर खाना खाएं, अच्छी और गहरी नींद लें साथ ही व्यायाम और योग अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
नोट: अधिक जानकारी और इलाज के लिए एक बार डॉक्टर से ज़रूर परामर्श लें।
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