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सुप्रीम कोर्ट ने Meta और WhatsApp विवाद पर क्यों कहा “नियम मानो या भारत छोड़ो”

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सुप्रीम कोर्ट ने Meta और WhatsApp विवाद पर क्यों कहा “नियम मानो या भारत छोड़ो”

Supreme Court Meta Over WhatsApp Policy in Hindi : क्या आपको पता है कि आज के डिजिटल युग में दुनिया के हर व्यक्ति के लिए व्हाट्सएप केवल एक मैसेजिंग ऐप नहीं है, बल्कि उसकी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन हाल ही में Supreme Court and WhatsApp के बीच चल रहे कानूनी विवाद को लेकर भारतीय यूजर्स में असमंजस की स्थिति को पैदा कर दिया है।

फरवरी 2026 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय की गई सुनवाई के अनुसार, Meta and WhatsApp Policy को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया गया है। आज हम आपको इस लेख में विस्तारपूर्वक समझाने की कोशिश करेंगे कि सर्वोच्च न्यायालय का व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर क्या कहना है?

व्हाट्सएप पॉलिसी के साथ क्या हुआ?

जैसाकि आप जानते हैं कि व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी का विवाद काफी साल पुराना है, लेकिन 2026 में इसने एक नया मोड़ ले लिया है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा व्हाट्सएप पर 213 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

जब आप इस पूरे मामले को देखें तो आपको पता चलेगा कि व्हाट्सएप द्वारा अपने यूजर्स का डेटा अपनी पैरेंट कंपनी Meta के साथ साझा किया जा रहा था, ताकि उसका इस्तेमाल विज्ञापनों और व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा सके।

WhatsApp Policy के बारे में बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कंपनी ने अपनी नीतियों को इतनी चालाकी से तैयार किया है कि एक आम नागरिक के लिए उन्हें समझना नामुमकिन है। कोर्ट ने इसे "निजी जानकारी की चोरी का एक सभ्य तरीका" करार दिया है।

कैसी है व्हाट्सएप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी?

इस पूरे विवाद के होने के कारण आपको WhatsApp's 2021 Privacy Policy को देखकर पता चलेगा। वर्ष 2021 में व्हाट्सएप द्वारा 'Take it or Leave it' यानि “मानो या छोड़ दो” वाली नीति को पेश किया गया था। व्हाट्सएप का अपनी इस नीति के माध्यम से कहना था कि यदि यूजर्स व्हाट्सएप का इस्तेमाल जारी रखना चाहते हैं, तो उन्हें अपना डेटा फेसबुक (अब मेटा) के साथ शेयर करने की अनुमति देनी होगी।

WhatsApp's 2021 Privacy Policy के अनुसार, यूजर्स के पास डेटा शेयरिंग से मना करने का किसी भी प्रकार का कोई प्रभावी विकल्प नहीं था। व्हाट्सएप की इस नीति पर भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा गहरी चिंता जताई गई है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि व्हाट्सएप ने अपनी 'मोनोपोली' (एकाधिकार) का फायदा उठाकर भारतीय नागरिकों को मजबूर किया है।

डेटा प्राइवेसी पर कोर्ट का कड़ा संदेश

हाल ही में, भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने Supreme Court Meta Over WhatsApp Policy के मामले में सुनवाई करते हुए एक ऐतिहासिक टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp पर अपनी टिप्पणी में कहा है कि "अगर आप हमारे देश के संविधान और निजता के अधिकार का सम्मान नहीं कर सकते, तो आप भारत छोड़ सकते हैं।" साथ ही कोर्ट ने इस बात को भी साफतौर पर कहा है कि Meta and WhatsApp Policy के नाम पर किसी को भी भारतीयों के निजी डेटा के साथ खेलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

Supreme Court Meta Over WhatsApp Policy विवाद को लेकर जस्टिस ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब कोई डॉक्टर को बीमारी का मैसेज भेजता है, तो तुरंत उसे उससे जुड़े विज्ञापन दिखने लगते हैं। यह इस बात का सबूत है कि डेटा का व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है।

क्या भारतीयों का डेटा असुरक्षित है?

वर्तमान समय में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सच में भारतीयों का डेटा असुरक्षित है? क्या सच में हमारे मैसेज और कॉल असुरक्षित हैं?

पिछले कई वर्षों से व्हाट्सएप दावा करता आ रहा है कि उसके सभी यूजर्स के मैसेज को 'एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड' रखा जाता हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि मैसेज के अलावा भी बहुत सारा 'मेटाडेटा' जैसेकि आप किससे बात कर रहे हैं, कब और कितनी देर बात कर रहे हैं यह सारी जानकारी कंपनियों को दे दिया जाता है।

भारतीयों नागिरकों के डेटा की सुरक्षा को ध्यान रखते हुए, कोर्ट ने मेटा से हलफनामा मांगा है कि वे भारतीय यूजर्स का डेटा किसी भी व्यावसायिक लाभ के लिए साझा नहीं करेंगे।

FAQs –

Q. सुप्रीम कोर्ट ने Meta-WhatsApp पर सख्त टिप्पणी क्यों की?

A. क्योंकि यूजर्स के डेटा और निजता के अधिकार का उल्लंघन हो रहा था।

Q. “नियम मानो या भारत छोड़ो” टिप्पणी का मतलब क्या है?

A. भारत के कानून और संविधान का पालन करना हर कंपनी के लिए जरूरी है।

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