ईरान युद्ध: क्या ट्रंप और नेतन्याहू के बीच पड़ने लगी है दरार?

Trump Netanyahu Rift over Iran War News in Hindi: जैसा कि आप जानते हैं कि दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड 'साउथ पार्स' पर हाल ही में हुए हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। गैस फील्ड पर हुए इस हमले के बाद, अब जो सबसे बड़ी खबर निकलकर आ रही है, वो युद्ध के मैदान से नहीं बल्कि वाशिंगटन और यरूशलेम के बंद कमरों से है।
खबरों के अनुसार, ऐसा कहा जा रहा है कि ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल में किसी बात को लेकर मतभेद नजर आ रहा है।
Trump Netanyahu Rift over Iran War News in Hindi
साउथ पार्स हमले पर ट्रंप ने क्या कहा?
बता दें कि इजरायल ने जब साउथ पार्स पर घातक हमला किया, तो ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में कतर के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया था, जिससे पश्चिमी देशों की सप्लाई लाइन प्रभावित हुई। दुनियाभर के विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान और इजरायल के बीच हुए इस युद्ध के बाद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं।
इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए इस हमले के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ पर इस बात को स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्हें इजरायल के इस खास हमले की कोई जानकारी नहीं थी।
यह बात इसलिए अजीब है क्योंकि इसराइली मीडिया लगातार दावा कर रही थी कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच इस हमले को लेकर पहले ही लंबी बातचीत और सहमति हो चुकी थी।
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ट्रंप की भाषा और कड़े संकेत का क्या मतलब है?
क्या आप भी इस बात से सहमत हैं? कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया, वह किसी करीबी दोस्त के लिए इस्तेमाल नहीं किए जा सकते हैं।
उन्होंने इसे "गुस्से में किया गया हमला" कहा। इतना ही नहीं, ट्रंप ने साफ़ शब्दों में चेतावनी दी कि इजरायल अब इस कीमती गैस फील्ड पर और कोई हमला नहीं करेगा।
कही ट्रम्प के द्वारा कही गई बातों का यह मतलब तो नहीं है कि ट्रंप अब नेतन्याहू को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं? बहुत से लोगों का ऐसा मानना है कि ट्रंप युद्ध को जल्द खत्म करके 'शांति पसंद राष्ट्रपति' की अपनी छवि को बचाना चाहते हैं, जबकि नेतन्याहू इस मौके का फायदा उठाकर ईरान की सत्ता को ही उखाड़ फेंकने की जिद पर अड़े हैं।
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ईरान को लेकर रणनीति में बड़ा अंतर क्यों?
- अमेरिका का रुख: ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान की मिसाइल और सैन्य ताकत को इतना कमजोर कर दिया जाए कि वह दोबारा सिर न उठा सके।
- इजरायल का रुख: जबकि नेतन्याहू के लिए यह युद्ध दशकों पुरानी दुश्मनी खत्म करने का सुनहरा मौका है। वे चाहते हैं कि इस दबाव के जरिए ईरान में विद्रोह हो और वहां का इस्लामी शासन पूरी तरह गिर जाए।
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ट्रंप की ईरान को सीधी धमकी की वजह क्या है?
कुछ भी हो, लेकिन यह बात तो साफ है कि भले ही ट्रंप इजरायल की कुछ हरकतों से नाराज दिख रहे हों, परन्तु उन्होंने ईरान को भी ढील नहीं दी है। ट्रंप ने कतर का बचाव करते हुए कहा कि कतर को इन हमलों के बारे में कुछ नहीं पता था।
उन्होंने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने दोबारा कतर के एलएनजी ठिकानों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की, तो अमेरिका अपनी पूरी ताकत से साउथ पार्स को तबाह कर देगा।
निष्कर्ष
क्या आपका भी ऐसा मानना है कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे इस मतभेद के दुष्परिणाम सम्पूर्ण दुनिया को दिन प्रतिदिन तेल और गैस की बढ़ती हुई कीमतों के रूप में देखनें को मिल रहे हैं? हाल ही में, ऐसा देखा गया है कि अमेरिका में भी इस युद्ध को लेकर आम जनता का समर्थन कम हो रहा है, जो ट्रंप के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
साफ है कि यह युद्ध अब सिर्फ हथियारों का नहीं रह गया है, बल्कि यह इस बात की भी परीक्षा है कि अमेरिका और इजरायल का गठबंधन इस दबाव को कब तक झेल पाता है।
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अक्सर आपके द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) –
प्रश्न : क्या अमेरिका और इजरायल के बीच वाकई कोई अनबन है?
उत्तर : खबरों को देखकर ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि 'साउथ पार्स' गैस फील्ड पर हमले को लेकर दोनों के बीच तालमेल की कमी दिखी है।
प्रश्न : डोनाल्ड ट्रंप 'साउथ पार्स' हमले से क्यों नाराज हैं?
उत्तर : हकीकत तो यह है कि ट्रंप की नाराजगी की मुख्य वजह तेल और गैस की बढ़ती कीमतें हैं। इस हमले के बाद वैश्विक बाजार में अस्थिरता आई है, जो ट्रंप की घरेलू आर्थिक नीतियों और 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' के एजेंडे को नुकसान पहुँचा सकती है।
प्रश्न : 'साउथ पार्स' गैस फील्ड इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर : यह गैस फील्ड इतना अधिक महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस क्षेत्र है, जो ईरान और कतर के बीच बंटा हुआ है। इस पर हमला होने का मतलब है पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई लाइन का खतरे में पड़ना, जिससे बिजली और ईंधन के दाम पूरी दुनिया में बढ़ सकते हैं।
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