Chhath Pooja 2025: छठ पूजा: सूर्य उपासना का पावन पर्व
छठ पूजा का महत्व
यह पर्व मुख्य रूप से छठी मैया और सूर्य देव की उपासना से संबंधित होता है। विशेषकर यह पर्व बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़े श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।
छठ पूजा हमें यह स्मरण कराती है कि सूर्य देव ही जीवन-ऊर्जा के परम स्रोत हैं। यह व्रत केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि अनुशासन, पवित्रता और आत्म-संयम का भी एक संदेश देता है।
छठ पूजा की लोक मान्यता
लोक मान्यता के अनुसार, उपवास रखकर सूर्य देव को अर्घ्य देने से "संतान सुख", "परिवार की समृद्धि" और "आरोग्य की प्राप्ति" होती है। यह व्रत अत्यंत कठोर भी होता है। तीसरे और चौथे दिन व्रती निर्जला उपवास करते हैं।
छठ की कथा और पारम्परिक कहानियाँ
एक कथा के अनुसार, जब भगवान राम ने रावण का वध करके अयोध्या लौटे, तब उन्होंने सूर्य पूजा और छठ व्रत किया था।
वही दूसरी कथा के अनुसार, जब द्रौपदी और कृष्ण के माध्यम से पांडवों को वनवास में संकट से मुक्ति दी गई, तब सूर्य उपासना की सुझाव दिया गया था।
तीसरी कथा में, एक वैश्य ने सूर्य देवता का अपमान किया था और इस वजह से वह अंधा हो गया था। छठ व्रत करने से उसकी दृष्टि लौट आई। इन कथाओं से यह संदेश मिलता है कि आस्था, तप और विधि-विधान के साथ किया गया व्रत व्यक्ति को हर संकट से मुक्त कर सकता है।
छठ पूजा के चार दिनों का व्रत
छठ पूजा के चार दिनों का व्रत है, जो इस प्रकार मनाया जाता है :-
पहला दिन - नहाय-खाय
दूसरा दिन - खरना
तीसरा दिन - संध्या अर्घ्य
चौथा दिन - उषा अर्घ्य और पारण
छठ व्रत की विधि (Chhath Vart Ki Vidhi)
दिन 1: नहाय-खाय
- जो व्रत रखता है वह सबसे पहले स्वच्छ होकर स्नान करता है, घर की सफाई करता है।
- सात्विक भोजन का ही सेवन किया जाता है, विशेष रूप से शुद्ध पीठा-भात आदि।
दिन 2: खरना
इस दिन शाम को व्रती गुड़ और दूध से प्रसाद बनाकर सूर्य देव को अर्पित करता है, इसके बाद व्रत निर्जला रूप ले लेता है।
जरूर करें:
सुबह स्नान-ध्यान के बाद व्रत का संकल्प लें।
प्रसाद तैयार करते समय साफ-सुथरी जगह चुनें।
न करें:
- साधारण नमक का प्रयोग न करें; सेंधा नमक ही करें।
- पूजा सामग्री को जूठे हाथों से न छुएं।
दिन 3: संध्या अर्घ्य
- इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
- घाट-तालों पर बड़े-बड़े समूह में व्रती और श्रद्धालु एकत्र होते हैं।
दिन 4: उषा अर्घ्य + पारण
- सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
- पारण में प्रसाद वितरित होता है, व्रती सामान्य आहार-पान शुरु करते हैं।
छठ पूजा का प्रसाद और त्यौहार से संबंधित विवरण
पारंपरिक प्रसाद में ठेकुआ, खीर, केले, गन्ने, लौकी-भात, आदि शामिल हैं।
प्रसाद बनाते समय व सामग्री के चयन में खास शुद्धता, सात्विकता, न्यूनतम नमक-मसाला आदि का ध्यान रखना होता है ।
प्रसाद तैयार करते समय मिट्टी का नया चूल्हा, आम की लकड़ी का उपयोग करना चाहिए।
धर्म, पूजा और व्रत से जुड़ी खास जानकारी
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